लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पीपल और बांबी पूजन की निभाई परंपरा
डग (झालावाड़)। नाग पंचमी के पावन अवसर पर डग नगर में अग्रवाल समाज के लोगों ने पारंपरिक श्रद्धा और आस्था के साथ नाग देवता का पूजन किया। इस अवसर पर महिलाओं ने पीपल के वृक्ष और सांपों की बांबी (बिल) की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
महाराजा अग्रसेन से जुड़ी है परंपरा
अग्रवाल समाज में नाग पंचमी का विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व माना जाता है। समाज की मान्यता के अनुसार, महाराजा अग्रसेन का विवाह नागराज की पुत्री माधवी से हुआ था। इसी कारण अग्रवाल समाज नाग देवता को अपने कुल रक्षक और पूर्वजों से जुड़ा मानते हुए विशेष श्रद्धा से उनकी पूजा करता है।
मान्यता है कि अग्रवंश के 18 पुत्रों के यज्ञाचार्यों के नाम पर ही समाज के 18 गोत्र अस्तित्व में आए और तभी से नाग पूजा की यह परंपरा चली आ रही है।
पीपल और बांबी पूजन का विशेष महत्व
नाग पंचमी पर अग्रवाल समाज में पीपल के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि पीपल के नीचे स्थित बांबी में नाग देवता का निवास होता है। इस परंपरा के माध्यम से प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाता है।
महिलाओं ने पूजन के दौरान दूध, रोली, अक्षत और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर नाग देवता का पूजन किया तथा परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना की।
ठंडे भोजन की परंपरा निभाई
अग्रवाल समाज में नाग पंचमी के दिन एक दिन पहले तैयार किया गया बासी अथवा ठंडा भोजन ग्रहण करने की परंपरा है। पूजा के बाद महिलाओं ने नाग पंचमी की कथा का श्रवण किया और परिवार के साथ प्रसाद स्वरूप पूर्व तैयार भोजन ग्रहण किया।
नाग देवता को माना जाता है रक्षक
समाज की मान्यता के अनुसार नाग देवता घर, धन और परिवार की रक्षा के प्रतीक माने जाते हैं। इसलिए नाग पंचमी पर विशेष श्रद्धा के साथ उनकी पूजा-अर्चना कर परिवार की सुरक्षा और समृद्धि की कामना की जाती है।
