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मुक्तिधाम उपेक्षा का शिकार, अंतिम यात्रा में आने वालों को हो रही परेशानी

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

संवाददाता: जितेंद्र बालोत, नसीराबाद (अजमेर)

अजमेर जिले के नसीराबाद स्थित शहर का एकमात्र मुक्तिधाम इन दिनों बदहाली का शिकार है। चारों ओर फैली कंटीली झाड़ियाँ और अंग्रेजी बबूल के पेड़ अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले लोगों के लिए बड़ी समस्या बने हुए हैं।

कंटीली झाड़ियों और गंदगी से जूझते लोग

रामसर रोड स्थित मुक्तिधाम के हालात इतने खराब हैं कि अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को झाड़ियों और गंदगी के बीच से गुजरना पड़ता है। नुकीले पेड़ों के कारण अर्थी को ले जाते समय शोकाकुल परिवार और साथ आए लोग तकलीफ झेलते हैं।

प्रशासन और जनप्रतिनिधि उदासीन

छावनी परिषद शहर में सौंदर्यीकरण और विकास कार्यों को तेजी से अंजाम दे रही है, लेकिन मुक्तिधाम की सुध लेने वाला कोई नहीं है। न छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी नीतिश गुप्ता ध्यान दे रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधि। इस अनदेखी को लेकर शहरवासियों में रोष है।

सुविधाओं का घोर अभाव

  • पीने के पानी की व्यवस्था नहीं – मुक्तिधाम बनने के बाद से आज तक यहां पानी की सुविधा तक उपलब्ध नहीं कराई गई।

  • अर्थी रखने की व्यवस्था नहीं – दाह संस्कार से पहले शव को रखने के लिए कोई उचित स्थान मौजूद नहीं है।

  • विश्राम स्थल जर्जर अवस्था में – बने हुए विश्राम स्थल इतने खराब हाल में हैं कि कभी भी गिर सकते हैं। बारिश और गर्मी में लोगों को सिर छिपाने की जगह तक नहीं मिलती।

समाजसेवी की मांग

समाजसेवी निहाल बड़जात्या का कहना है कि “मुक्तिधाम को आधुनिक रूप से विकसित किया जाना चाहिए और यहां आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जानी चाहिए।”

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