मंत्री जी क्या खाद, बीज कंपनियों को अनुमति देने वालों पर भी होगी कार्रवाई?

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

विशेष संवाददाता

श्री गंगानगर में  कृषि मंत्री डॉ किरोडी लाल मीणा की बीज कंपनियों पर छापेमारी दूसरे दिन भी जारी रही ,कई बीज निर्माता कंपनियां ताले लगाकर भाग गई।  उन्होंने आज फैक्ट्री के ताले तक नहीं खोलें। डॉ किरोडी लाल मीणा अपनी कार्यशैली के लिए जनता मे चर्चा में  है। इसलिए भी है क्योंकि वह लगातार किसानों से जुड़े हुए काम को दमदार तरीके से कर रहे हैं । दरअसल पहले डॉक्टर किरोडी लाल मीणा ने किशनगढ़ और जयपुर  में कई खाद की फैक्ट्रियां पकड़ी, जहां पर मिट्टी ,बजरी ,मार्बल की सलेरी ,आदि को मिलाकर नकली खाद बनाकर किसानों को लूटा जा रहा था।  उनके निर्देश पर करीब एक दर्जन खाद बनाने वाली कंपनियां सीज कर दी गई है।  उसके बाद से वह लगातार 2 दिन से श्रीगंगानगर में है।  वहां पर भी उन्होंने आठ कंपनियों पर मंगलवार को कृषि विभाग के अधिकारियों ने छापेमारी की।  आठ कंपनियों को सीज कर दिया गया । बुधवार को सवेरे से ही वह फिर अपने मुद्दे पर है और लगातार वह काम पर कर  है।  आज भी बीज निर्माता कंपनियों मे तरह की अनियमितताएं पकड़ी गई ।  कंपनियों मे केमिकलों के रंग से भरे हुए ड्रम मिले । यह  केमिकल रंग बीजों को रंगने के काम आता था, जिससे उनमें चमक बढ़ाई जा सके और ऊंचे दंगों पर उन्हें बेचा जा सके । वाक्य में डॉक्टर किरोडी लाल मीणा  सही  कार्रवाई  कर रहे हैं और वह बेहतरीन काम कर रहे हैं।

खाद बीज कंपनियों को अनुमति देने वालों पर भी होगी कार्रवाई?

डॉक्टर किरोडी लाल मीणा की मेहनत में कोई कमी नहीं है लेकिन यह पहली बार है जब इतने सालों बाद में खाद, बीज कंपनियों पर भी इस तरह की रेड मारी गई और उनकी अनीमिताएं जनता के सामने आई। फसल नहीं होने पर, फसल जल जाने पर, फसल पैदा नहीं होने पर किसानों की  यदि वह बहुत सारे किसानों को नुकसान हो तो वह मीडिया तक कुछ बातें पहुंचती थी । खबरें बनती थी दो-चार दिन खबरें छपी उसके बाद में कोई लेना देना नहीं । लेकिन पहली बार कृषि मंत्री के निर्देश पर मैं केवल खाद बनाने वाली फैक्ट्रियां पकड़ी गई। नकली बीज बनाने वाली फैक्ट्रियां भी सीज की गई । लोगों का कहना है कि जिन फैक्ट्री में बीज और खाद बनाया जा रहा था उनको अनुमति भी कृषि विभाग से जुड़े हुए बीज निगम ही देता है।  बताया जा रहा है कि बीज निगम के अध्यक्ष से लेकर वहां पर बैठने वाले आला अधिकारियों तक मोटा कमीशन बीज कंपनियां देती है । खाद कंपनियां देती है और एक बीज कंपनी एक एक बीज  की अनुमति लेने के लिए ही लाखों रुपए की डील करती है ।

खाद- बीज के अमानक तय कराने के लिए एजेंटस फिक्स

ऐसा जानकारी में आया है और इसके लिए बाकायदा बीज निगम में ,कृषि विभाग में दलाल फिक्स है, जो अधिकारियों और बीज कंपनियों के बीच में सेतु का काम करते हैं । जिस तरह से दवा कंपनियों और डॉक्टर के बीच में एमआर काम करते हैं । इस तरह बीज कंपनियों और बीज निगम के बीच भी एजेंट टाइप के लोग काम करते हैं, जो ऊपर तक भी कमीशन पहुंचाते हैं।  बड़े अधिकारियों तक भी कमिश्न  जाता हैं और उनकी अनुमति के बाद ही किसी भी वस्तु का बीज चाहे वो गेहूं का हो, या किसी भी का,  उसको बाजार में सप्लाई करने की अनुमति मिलती है।  जाहिर सी बात है कि कृषि मंत्री जी ने कार्यवाही तो कर दी लेकिन क्या उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही होगी जो इन बीजों की बिक्री की अनुमति देते हैं ।  जो लोग इसकी अनुमति देने में शामिल है क्या कभी उन्होंने इन कंपनियों पर कार्यवाही की है।  क्योंकि उन्हें वेतन ही इस बात का मिलता है कि वह उच्च गुणवत्ता का बीज तैयार करवाकर किसानों तक पहुंचाएं । लेकिन क्या उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया । अगर नहीं किया तो उनके खिलाफ भी एक्शन होना चाहिए, जो यह एक बड़ा कॉक्स बना हुआ है । बीज कंपनियां ,खाद कंपनियों और किसानों के बीच में दुकानदारों के बीच में, क्योंकि जिन दुकानदारों से किसान लोग खाद, बीज खरीदने हैं वह भी मोटे कमीशन के चक्कर में नकली माल उनको बेचते हैं । लोगों का यह कहना है की सबसे पहली बात तो की मंत्री जी को चाहिए कि  इस पूरी जो रूट पर काम करें और जो कमीशन का मोटा खेल है ,उसको बंद करें, जिससे कि यह कंपनियां भी अच्छा बीज बना सके अच्छा खाद।

क्या दूसरे विभागों के मंत्री भी किरोड़ी लाल मीणा से सीख लेंगे

एक बात की चर्चा हो रही है लोगों का सीधा-सीधा कहना है कि क्या राजस्थान में एक ही मंत्री है जो इस तरह से दिन रात एक करके काम कर रहा है और यदि किरोड़ी लाल मीणा सही काम कर रहा है तो क्या दूसरे विभागों में इस तरह की अनियमितता नहीं है ,जबकि वहां अन्य नेताओं से भी लोग अनियमितताओं के बारे में सीधे मंत्रियों को भी शिकायत करते हैं । उनके मुख्य सचिवों को भी शिकायत करते हैं । प्रशासनिक अधिकारियों को भी शिकायत करते हैं।  लेकिन होता कुछ नहीं है, भले ही यूडीएच का मामला हो, या किसी अन्य विभाग का उसके लिए लेकर शिकायतें लगातार होती है तो तो भी विभागीय अधिकारी मंत्री एक्शन नहीं लेते।   इसके लिए मंत्री को खुले में उतरना होगा। चिकित्सा मंत्री को भी इसी तरह से छापेमारी करनी होगी क्योंकि एलोपैथी में 5:00 पैसे की दवा ₹100 में बिक रही है और आयुर्वेद में तो जांच होती नहीं है, तो वहां कौन क्या बेच रहा है ,किसी को पता ही नहीं है? क्योंकि वहां पर आज तक कार्यवाही के नाम सिर्फ खानापूर्ति होती है।  जबकि वहां भी आजकल कमीशन का मोटा खेल चल रहा है।  इसी तरह जो दूसरे विभाग है वहां भी इसी तरह के गड़बड़  हो रहे हैं ,जिनको रोकना जरूरी है । क्या मुख्यमंत्री जी अन्य विभागों के अधिकारियों को, मंत्रियों को भी इस तरह से पाबंद करेंगे कि वह भी फील्ड में उतरकर जनहित के लिए कुछ इस तरह के कदम उठाएंगे।  क्योंकि डॉक्टर किरोडी लाल मीणा के काम से सरकार की साख सुधर रही है ,लोगों को यह विश्वास जगाया कि नहीं ऐसे जो लोग जनता के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं ,उनके प्रति सरकार सख्त रवैया अपनाएगी ,उन्हें किसी भी कीमत पर बक्सा नहीं जाएगा ।  हाल ही में जिस तरह से पुलिस  ने भी पुलिस वालों के साथ मारपीट करने वालों के साथ जिस तरह का सार्वजनिक रूप से उनकी परेड़  कराकर उनकी बारात निकाली है उससे भी यह मैसेज गया है कि यह सरकार गुंडागर्दी करने वालों को छोड़ने के मूंड में नहीं है। अजमेर किशनगढ़ में ड्राइवर को जेसीबी से लटकाकर पीटने वाले हिस्ट्रीशीटर की पहले सार्वजनिक तौर पर परेड़ निकाली और फिर उसका अतिक्रमण भी हटा दिया गया।  ये सरकार के कड़े फैसले ऐसे है जिनसे जनता में सरकार के प्रति भरोसा जागता है।

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