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जातीय जनगणना को लेकर ओबीसी समाज की प्रेस वार्ता, आरक्षण व्यवस्था पर उठाए सवाल

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जयपुर। राष्ट्रीय जनगणना और आगामी पंचायतराज चुनाव से पहले जातीय जनगणना को लेकर ओबीसी वर्ग की विभिन्न प्रमुख जातियों ने एकजुट होकर पिंकसिटी प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता आयोजित की। इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने जातीय गणना और आरक्षण व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

‘उपजाति नहीं, मूल जाति का ही करें उल्लेख’

प्रेस वार्ता में ओबीसी समाज के प्रतिनिधियों ने अपील की कि आगामी जनगणना में जाति का उल्लेख करते समय वही नाम लिखा जाए जो राजस्थान और केंद्र सरकार की ओबीसी सूची में दर्ज है। उन्होंने कहा कि उपजाति या गोत्र का उपयोग करने से आंकड़ों में भ्रम पैदा हो सकता है, इसलिए केवल मूल जाति का ही उल्लेख किया जाना चाहिए।

‘जातीय जनगणना के बिना आरक्षण अधूरा’

प्रतिनिधियों ने कहा कि जातीय जनगणना के बिना आरक्षण व्यवस्था का सही आकलन संभव नहीं है। उनका कहना था कि देश में लगभग 70 प्रतिशत आबादी ओबीसी वर्ग की है, जबकि उन्हें मात्र 21 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है, जो पर्याप्त नहीं है।

ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर उठे सवाल

प्रेस वार्ता में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) को दिए जा रहे 10 प्रतिशत आरक्षण पर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि जिन वर्गों को यह आरक्षण दिया गया है, उनके प्रतिशत का आधार स्पष्ट नहीं है, जबकि ओबीसी को मंडल आयोग और ‘इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ’ के फैसले के बावजूद सीमित आरक्षण दिया जा रहा है।

सामाजिक न्याय की मांग

ओबीसी समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

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