लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
परिजनों ने लगाया गलत इंजेक्शन और लापरवाही का आरोप, मेडिकल टीम जांच में जुटी
सिरोही | तुषार पुरोहित
पिंडवाड़ा क्षेत्र में इलाज के बाद साढ़े तीन वर्षीय बच्ची की मौत का मामला सामने आने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। परिजनों ने निजी अस्पताल संचालक पर इलाज में लापरवाही और गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने संबंधित निजी अस्पताल को सीज़ कर दिया है, जबकि मेडिकल टीम पूरे प्रकरण की जांच में जुटी हुई है।
उल्टी के बाद बिगड़ी तबीयत, अस्पताल ले गए परिजन
जानकारी के अनुसार सिवेरा निवासी जितेंद्र कुमार मेघवाल की साढ़े तीन वर्षीय पुत्री हेजल परमार की मंगलवार सुबह अचानक उल्टी होने के बाद तबीयत बिगड़ गई। परिजन सुबह करीब 11 बजे बच्ची को पिंडवाड़ा स्थित चौधरी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल संचालक ने बच्ची की पूरी जांच किए बिना स्टाफ से इंजेक्शन लगवाया और दवाइयां लिखकर घर भेज दिया।
अस्पताल से निकलते ही बेहोश हुई बच्ची
परिजनों के अनुसार अस्पताल से बाहर निकलते ही बच्ची अचानक बेहोश हो गई। शुरुआत में उन्होंने इसे इंजेक्शन का सामान्य असर समझा, लेकिन घर पहुंचने के बाद भी बच्ची के शरीर में कोई हरकत नहीं हुई। इसके बाद परिजन उसे पिंडवाड़ा के एक अन्य निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां कथित रूप से चिकित्सकों ने केस लेने से इनकार कर दिया।
बाद में बच्ची को आबूरोड स्थित चिकित्सक डॉ. राजकुमार के पास ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
उम्र से अधिक पावर का इंजेक्शन लगाने का आरोप
पीड़ित पिता जितेंद्र कुमार मेघवाल ने आरोप लगाया कि बच्ची को उसकी उम्र के अनुसार अधिक पावर का इंजेक्शन लगाया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। परिजनों ने पुलिस में मामला दर्ज कर कार्रवाई करने तथा मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाने की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अस्पताल सीज़, दस्तावेज नहीं मिले
मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने चौधरी हॉस्पिटल पर कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सीज़ कर दिया। जांच के दौरान अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन से संबंधित दस्तावेज, पीयूसी, फायर एनओसी सहित अन्य आवश्यक अनुमति पत्र मौके पर उपलब्ध नहीं मिले।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद ही अस्पताल को पुनः संचालित करने की अनुमति दी जाएगी।
मेडिकल टीम कर रही इंजेक्शन की जांच
प्रशासन की ओर से गठित मेडिकल टीम मृतक बच्ची को लगाए गए इंजेक्शन सहित पूरी उपचार प्रक्रिया की जांच कर रही है। डॉ. भूपेंद्र प्रताप के अनुसार क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन, बायो-मेडिकल वेस्ट ऑथराइजेशन, फायर एनओसी और फार्मेसी लाइसेंस जैसे दस्तावेज अनिवार्य हैं, जो मौके पर उपलब्ध नहीं पाए गए।
पूर्व में भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
गौरतलब है कि सरूपगंज के काछोली गांव में 1 मार्च 2025 को जाह्नवी नामक मासूम की भी कथित गलत इंजेक्शन लगाने से मौत का मामला सामने आया था। तब परिजनों ने आरोप लगाया था कि बच्ची को सामान्य सर्दी-जुकाम की शिकायत थी, लेकिन निजी अस्पताल में गलत इंजेक्शन लगाए जाने से उसकी जान चली गई थी।
अधिकारियों के निर्देश पर हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई डॉ. दिनेश खराड़ी और नरेंद्र जांगिड़ के निर्देश पर की गई। कार्रवाई के दौरान BCMO, DI, RI, पटवारी एवं पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही।



















































