लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया और गुड गवर्नेंस के संकल्प को साकार करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने राजस्व सुधार और वृद्धि के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। डिजिटलाइजेशन और आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पारदर्शिता आई, फर्जी बिलिंग, अवैध खनन और अन्य राजस्व लीकेज गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित हुआ।
राज्य सरकार ने राजस्व सुधारों और संरचनात्मक बदलावों के माध्यम से टैक्स और नॉन-टैक्स दोनों श्रेणियों में सुधार किए। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य के कुल राजस्व में 12.60 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 14,200 करोड़ रुपये अधिक राजस्व प्राप्त हुआ।
जीएसटी एवं वाणिज्यिक कर सुधार
राज्य सरकार ने रेवेन्यू इंटेलीजेंस आधारित डेटा एनालिटिक्स को सुदृढ़ करते हुए 45 से अधिक डेटा ड्रिवन रिपोर्ट्स तैयार की, जिससे फर्जी बिलिंग की पहचान और रोकथाम संभव हुई। ई-वे बिल मिलान, रिटर्न प्रोफाइलिंग और आधुनिक आईटी टूल्स के माध्यम से हाई-रिस्क करदाताओं की निगरानी की गई। इसके परिणामस्वरूप संदिग्ध और फर्जी पंजीकरणों की पहचान कर उन्हें निरस्त किया गया, जिससे कर प्रणाली अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनी। आईटीएमएस जैसे नवाचारों ने व्यापारियों के लिए फाइलिंग प्रक्रिया को सरल और सहज बनाया, जिससे राजस्व नियमों का पालन बढ़ा।
आबकारी विभाग में डिजिटल मॉनिटरिंग
आबकारी विभाग ने पिछले दो वर्षों में अवैध शराब निर्माण, परिवहन और बिक्री पर इंटेलिजेंस आधारित सघन अभियान चलाए। इन अभियानों में बड़ी मात्रा में अवैध शराब जब्त की गई और अवैध भट्टियों को नष्ट किया गया, जिससे तस्करी और राजस्व लीकेज पर प्रभावी रोक लगी।
राज्य सरकार ने ई-एक्साइज प्रणाली, क्यूआर आधारित ट्रैकिंग, डिजिटल परमिट सिस्टम और एंड-टू-एंड सप्लाई चेन मॉनिटरिंग लागू कर आबकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुपालन में सुधार किया। शराब दुकानों के आवंटन में ई-लॉटरी प्रणाली अपनाई गई, जिससे मानवीय हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार की संभावना समाप्त हुई।
स्टांप और पंजीकरण विभाग में सुधार
राज्य में स्टांप और पंजीकरण कार्य में डिजिटल सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आए। ई-पंजीयन, ई-ग्रास, राज स्टाम्प और 181 हेल्पडेस्क जैसी ऑनलाइन प्रणालियों के माध्यम से रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और सरल हुई। इसके परिणामस्वरूप पिछले दो वर्षों में 50 लाख से अधिक दस्तावेजों का पंजीकरण किया गया और 20,599 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व प्राप्त हुआ।
राज्य सरकार ने संपत्ति हस्तांतरण, महिलाओं के नाम संयुक्त रजिस्ट्री, छोटे फ्लैटों की खरीद, टीडीआर और डेबट असाइनमेंट पर स्टांप ड्यूटी में महत्वपूर्ण रियायतें दी। इसके अलावा भूमि कर और स्टांप ड्यूटी से जुड़े पुराने विवादों के समाधान हेतु एमनेस्टी योजनाएं लागू की गईं, जिससे उद्योगों और आम नागरिकों को राहत मिली। प्रदेश के 10 मिनी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को मॉडल ऑफिस के रूप में विकसित किया गया है और शेष 106 कार्यालयों को इसी श्रेणी में लाने की प्रक्रिया जारी है।
डिजिटल गवर्नेंस की व्यापक सफलता
राजस्थान सरकार द्वारा अपनाए गए डिजिटल उपायों से शासन प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता बढ़ी है। तकनीकी सुधारों ने राज्य के वित्तीय ढांचे को मजबूत किया, कर चोरी और अवैध गतिविधियों को कम किया, और नागरिकों के लिए सेवाओं की पहुंच आसान बनाई। डिजिटल गवर्नेंस के इन प्रयासों ने न केवल राजस्व संग्रह को बढ़ाया, बल्कि व्यापारियों, उद्योगों और आम नागरिकों के लिए भी प्रक्रिया को सरल और भरोसेमंद बनाया।
राज्य सरकार की यह उपलब्धि डिजिटल इंडिया और गुड गवर्नेंस के लक्ष्य को साकार करने में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।