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भूमिहीन कृषि मज़दूरों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर संगोष्ठी संपन्न

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

विजय कपूर की रिपोर्ट
बीकानेर। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय बीकानेर और RHRD. फाउन्डेशन बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय परिसर के मानव संसाधन विभाग में भारत वर्ष में भूमिहीन कृषि मज़दूरों की सामाजिक आर्थिक स्थिति पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई ।मंचासीन अतिथियों द्वारा भारतमाता के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर औपचारिक शुभारंभ किया । कार्यक्रम के दौरान उपस्थित शोधार्थियों, प्राध्यापक, महिला और पुरुष कृषक समुदाय को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता भारतीय मज़दूर संघ के अखिल भारतीय संगठन मन्त्री श्री बी. सुंदरन जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि समाज़ के यथार्थ सत्य को समझना ज़रूरी है ,गाँव में मज़दूर क़िसान व्यापारी कुशल कारीगर सभी के बीच समन्वय है, भारतीय समाज की यही विशेषता जिसमें सभी जाति समाज अपनी अपनी विधाओं में पारंगत होते हैं ऐसा विश्व में कहीं नहीं है। हमें अपने जीवन में खाने की आदतों में भी ग्रामीण व्यवस्था झलकनी चाहिए ताकि हम अपने क्षेत्र में ज्वार,बाजरा मोटा अनाज, सांगरी या अन्य विशेष वस्तुएँ जो कि उस क्षेत्र को पहचान देती हैं उन्हीं का उपयोग करें। महानरेगा से परिवारों के अंदर मज़दूर वर्ग को कुछ इकॉनॉमिक ताक़त मिलीं, समाज में सभी नागरिकों को मिलकर कार्य करना है इस हेतु भी हम सब को प्रेरित करना चाहिए ज़मीन का उचित वितरण सभी को होनी चाहिए तथा कृषि-मज़दूर को सरकारी सहायता भी नहीं मिलती है क्योंकि उसके नाम से ज़मीन नहीं है और सम्माननिधी भी नहीं मिलती है। इन सबकी स्थिति को ध्यान में रख कर हमें बिहार और राजस्थान में चलने वाली आजीविका संचालन की तरह कुछ योजना की जाना चाहिए कुछ व्यवस्था की जानी चाहिए ।

सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में ब्यूरोक्रेट पर अंकुश भूमि वितरण समाज में जागृति लाना स्थानीय आवश्यकता के अनुसार किसान और मज़दूरों में परिवर्तन किया जाना मोटे अनाज का उपयोग किया जाना कृषि आधारित लघु उद्योग लगाने वाले पुरुष एवं महिला की पहचान करना जिनके नाम से ज़मीन नहीं है ऐसे परिवारों की पहचान करना और उस पर कार्य करना उनको सहयोग के लिए कुछ विशेष कार्य करने पर ज़ोर दिया जाना चाहिए। गांवों में नया विचार लाने और बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए पूरे विश्व में हमारी भारतीय की पहचान हमारे गाँव के कारण है न कि अन्य कारणों से, अतः हमें गांवों को संबल देना चाहिए। इसी विषय पर डा. धर्मवीर चंदेल द्वारा शोधपत्र का वाचनकर समस्या के विविध आयामों पर प्रकाश डालते हुए अंबेडकर जी द्वारा किए गए प्रयासों की चर्चा की और गाँव की खुशहाली में देश की खुशहाली को ध्यान में रखकर योजनाएँ बनाने की आवश्यकता प्रतिपादित की।संगोष्ठी के मुख्य अतिथि माननीय कुलाधिपति हरिसिंह गौड़ कृषि विश्वविद्यालय सागर के. एल. बेरवाल द्वारा RHRD के माध्यम से सामाजिक सौहार्द स्थापित किए जाने वाले प्रयासों के बारे में जानकारी दी तथा अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही श्रीमती डॉ. विमला डुकवाल द्वारा सभी अतिथियों किसानों आगंतुक मेहमानों का धन्यवाद और आभार प्रकट किया गया और राष्ट्रगान से समापन किया गया । कार्यक्रम का मंच संचालन गोमाराम जीनगर द्वारा किया गया ।जलपान ग्रहण करके समस्त आगंतुक प्रस्थान कर गए।

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