लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
मनजीत सिंह | ब्यूरो चीफ, श्रीगंगानगर
श्रीगंगानगर। आज 8 जनवरी है। ठीक दो वर्ष पूर्व इसी दिन श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव का परिणाम घोषित हुआ था, जिसने प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था। इस उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रूपिन्द्र सिंह कुन्नर ने जीत दर्ज कर न केवल नवगठित भाजपा सरकार को करारा झटका दिया, बल्कि पूरे देश में कांग्रेस की राजनीतिक मजबूती का संदेश भी दिया था।
कड़ाके की सर्दी के बीच आए इस चुनाव परिणाम ने श्रीकरणपुर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान की राजनीति में गर्माहट पैदा कर दी थी। इस उपचुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी को सात में से पांचवीं बार हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने केंद्र से लेकर राज्य स्तर तक के मंत्रियों और विधायकों को श्रीकरणपुर में तैनात कर रखा था, इसके बावजूद पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस हार के लिए प्रदेश भाजपा हाईकमान की रणनीति भी जिम्मेदार रही। कार्यकर्ताओं, सर्वे एजेंसियों और आम जनता की स्पष्ट राय थी कि इस बार किसी नए चेहरे को मैदान में उतारा जाए, लेकिन इन सभी संकेतों को नजरअंदाज करते हुए पार्टी ने एक बार फिर पुराने चेहरे पर भरोसा जताया, जिसका खामियाजा चुनाव परिणाम में भुगतना पड़ा।
गौरतलब है कि उस समय राज्य में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा सरकार बने मात्र 15 दिन ही हुए थे कि यह हार सामने आ गई। इस उपचुनाव के बाद कांग्रेस को पूरे प्रदेश में नई ऊर्जा मिली, जिसका असर आगामी लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिला, जहां कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद अंता विधानसभा उपचुनाव में भी कांग्रेस की जीत ने भाजपा की चिंताएं बढ़ा दीं।
श्रीकरणपुर विधानसभा उपचुनाव कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए संजीवनी साबित हुआ, जबकि भाजपा की राजनीतिक हवा को भारी नुकसान पहुंचा। आज दो वर्ष बाद भी श्रीकरणपुर क्षेत्र में इस उपचुनाव की चर्चा आम है और राजनीतिक हालात में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय नेताओं का मानना है कि यदि भाजपा हाईकमान समय रहते नए नेतृत्व को आगे नहीं लाता है, तो आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों में पार्टी को फिर से नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि यह उपचुनाव पूर्व मंत्री गुरमीत सिंह कुन्नर के निधन के कारण हुआ था। भाजपा ने हार की आशंका के चलते चुनाव के दौरान ही अपने प्रत्याशी सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी को कई विभागों का मंत्री भी बना दिया था, लेकिन इसके बावजूद जनता ने भाजपा प्रत्याशी को नकारते हुए कांग्रेस को विजयी बनाया और भाजपा का टिकट “बैरंग जयपुर” लौटा दिया।
दो वर्ष बीत जाने के बाद भी यह उपचुनाव श्रीकरणपुर की राजनीति में एक अहम मोड़ के रूप में याद किया जाता है, जिसकी गूंज आज भी क्षेत्र में सुनाई देती है।