लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
दो आरपीएस और एक जेल अधिकारी पर कार्रवाई
जयपुर। प्रदेश में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में लापरवाही को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने अनियमितता और दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने पर राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) के दो अधिकारियों और जेल सेवा की एक अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई को मंजूरी दी है।
मुख्यमंत्री ने महिला बंदी सुधार गृह, जयपुर की उपाधीक्षक सरोज विश्नोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जयपुर से भरतपुर निर्धारित किया गया है।
सरोज विश्नोई के खिलाफ प्राप्त शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि वे सुधार गृह की एक महिला बंदी को अपने साथ रखती थीं और उक्त बंदी का कार्यालय के कार्यों में हस्तक्षेप था। इसके अलावा बंदियों को नियम विरुद्ध सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पैसे लेने जैसी शिकायतें भी सामने आई थीं।
एसीपी देरावर सिंह के खिलाफ सीसीए नियम 16 में कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने जोधपुर पुलिस आयुक्तालय में पदस्थापित सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर क्राइम) देरावर सिंह के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम-1958 के नियम 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।
देरावर सिंह पर आरोप है कि पुलिस थाना कामां, डीग में पुलिस निरीक्षक पद पर रहते हुए उन्होंने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती। हत्या जैसे गंभीर मामले में आठ आरोपियों में से केवल एक आरोपी को अनुसंधान में दोषी मानते हुए अन्य सात आरोपियों को बचाने का प्रयास करने का आरोप लगाया गया है।
आरपीएस लाभुराम विश्नोई के खिलाफ आरोप प्रमाणित
मुख्यमंत्री ने आरपीएस अधिकारी लाभुराम विश्नोई के विरुद्ध विभागीय जांच रिपोर्ट का भी अनुमोदन किया है। जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए गए हैं।
लाभुराम विश्नोई पर आरोप है कि सवाईमाधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा थाना क्षेत्र में बनास नदी में बजरी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान अवैध खनन और परिवहन रोकने संबंधी निर्देशों की अवहेलना की गई। इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई और पुलिस जाब्ते की सुरक्षा भी खतरे में पड़ी। साथ ही संबंधित विभागों के साथ आवश्यक समन्वय नहीं करने की बात भी सामने आई।
मुख्यमंत्री के इन फैसलों से प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और अधिकारियों-कर्मचारियों की कार्यशैली में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने का संदेश दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि कानून-व्यवस्था और सरकारी दायित्वों में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।