लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चुनाव आयोग ने सिस्टमैटिक वोटर्स रजिस्ट्रेशन (SIR) प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस प्रक्रिया में 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटि-मुक्त, पारदर्शी और अद्यतन बनाना है।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की मुख्य जानकारी
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ड्राफ्ट सूची में अब लगभग 7.08 करोड़ मतदाता दर्ज हैं
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इससे पहले मतदाताओं की संख्या करीब 7.66 करोड़ थी
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कुल 58,20,000 से अधिक नाम हटाए गए
❌ नाम हटाए जाने के प्रमुख कारण
चुनाव आयोग के मुताबिक हटाए गए नामों में शामिल हैं:
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मृत पाए गए मतदाता
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स्थायी रूप से अन्य स्थान पर स्थानांतरित मतदाता
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अपने पते पर अनुपस्थित मतदाता
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डुप्लीकेट (दोहरी) प्रविष्टियां
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अन्य प्रशासनिक त्रुटियां
आयोग का कहना है कि यह कार्रवाई ग्राउंड-लेवल सत्यापन और रिकॉर्ड मिलान के बाद की गई है।
अगर आपका नाम सूची से हट गया है तो क्या करें?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि:
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जिन मतदाताओं का नाम गलती से हट गया है, वे Form-6 के जरिए दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं
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आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि: 15 जनवरी 2026
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दावों और आपत्तियों की जांच: 16 जनवरी से 7 फरवरी 2026
अंतिम मतदाता सूची कब आएगी?
सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को जारी की जाएगी।
️ राजनीतिक प्रतिक्रिया
ड्राफ्ट सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाए हैं, जबकि चुनाव आयोग ने इसे नियमित और आवश्यक प्रक्रिया बताया है।
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया देशभर में अपनाई जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में हो और कोई अपात्र नाम न रहे।
पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होना चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। हालांकि 58 लाख से अधिक नाम हटाए जाने से चिंता बढ़ी है, लेकिन मतदाताओं को आपत्ति दर्ज कराने और नाम जोड़ने का पूरा अवसर दिया गया है।




















































