लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
चौमहला की पहल पहुंची बड़े शहरों तक
सहकार भारती, गौसेवा संरक्षण समिति और डॉ. रेखा वर्मा की पहल बनी महिला सशक्तिकरण का मॉडल
गंगधार, झालावाड़। आधुनिकता की दौड़ में जहां एक ओर गौवंश के संरक्षण की चुनौती बनी हुई है, वहीं झालावाड़ जिले के गंगधार उपखंड क्षेत्र में गौसेवा को रोजगार से जोड़ने की अनूठी पहल सामने आई है। चौमहला कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सहकार भारती, गौसेवा संरक्षण समिति भवानीमंडी और एसएस सोनोग्राफी सेंटर चौमहला की संचालिका डॉ. रेखा वर्मा के प्रयासों से महिलाओं द्वारा गाय के गोबर से पर्यावरण अनुकूल राखियां, दीपक और अन्य गौमय उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।
इन उत्पादों को न केवल स्थानीय स्तर पर सराहना मिल रही है, बल्कि बड़े शहरों से भी इनके ऑर्डर मिल रहे हैं। रक्षाबंधन और दीपावली जैसे पर्वों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जा रहे गोबर से बने उत्पाद ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का नया जरिया बन रहे हैं।
लखनऊ और नागपुर तक पहुंची गौमय राखियां-दीपक
डॉ. रेखा वर्मा ने बताया कि महिलाओं द्वारा तैयार किए गए गौमय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि लखनऊ में 10 हजार और नागपुर में 10 हजार राखियों के ऑर्डर भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में गौमय दीपक भी नागपुर भेजे जा रहे हैं।
इस पहल की खास बात यह है कि इन उत्पादों के निर्माण से लेकर उनकी तैयारी तक का बड़ा हिस्सा ग्रामीण महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। इससे उन्हें घर के आसपास रहते हुए रोजगार और आय का अवसर मिल रहा है।
तीन गांवों की महिलाओं को दिया प्रशिक्षण
इसी उद्देश्य को लेकर सहकार भारती, गौसेवा संरक्षण समिति भवानीमंडी और एसएस सोनोग्राफी सेंटर चौमहला के संयुक्त तत्वावधान में गंगधार क्षेत्र के गोलखेड़ी, पीपाखेड़ी और बोरखेड़ी गांवों की महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए पूर्व में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था।
प्रशिक्षण में मुख्य प्रशिक्षक अनुराधा श्रीवास्तव और तुषार श्रीवास्तव ने महिलाओं को गोबर और अन्य पर्यावरण हितैषी सामग्री से आकर्षक राखियां और दीपक बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने अपने हाथों से गौमय उत्पाद तैयार किए और इसे स्वरोजगार की दिशा में उपयोगी पहल बताया।
गौमय उत्पादों से रोजगार की संभावनाओं पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान तुषार श्रीवास्तव ने गौमाता के धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने गोबर एवं गौमूत्र से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों, जैविक खाद, सीएनजी और गौशालाओं के माध्यम से रोजगार सृजन की संभावनाओं की जानकारी दी। साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए उपलब्ध स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों के बारे में भी बताया।
एक लाख से अधिक दीपक खरीदने का आश्वासन
सहकार भारती के प्रमुख रविन्द्र कुमार जायसवाल ने महिला स्वयं सहायता समूहों का उत्साहवर्धन करते हुए एक लाख से अधिक गौमय दीपकों एवं अन्य उत्पादों की खरीद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से इन उत्पादों की मार्केटिंग, ब्रांडिंग और बाजार उपलब्ध कराने में हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
इस पहल से एक ओर गौसेवा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है।




















































