लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
न्यायालय की अनुमति के बिना परिसर से जुड़ा नया टेंडर जारी नहीं होगा, अगली सुनवाई 6 अगस्त को
जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने ऐतिहासिक विध्याधर का बाग स्मारक एवं आरक्षित वन क्षेत्र के संरक्षण से जुड़े जनहित याचिका मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि उसकी पूर्व अनुमति के बिना परिसर से संबंधित कोई नया टेंडर जारी नहीं किया जाएगा।
यह आदेश सिटिजन्स प्रोटेक्शन सोसायटी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विध्याधर का बाग, जो एक संरक्षित स्मारक होने के साथ-साथ आरक्षित वन क्षेत्र में स्थित है, वहां आयोजित होने वाले विवाह समारोह, तेज ध्वनि, लेज़र लाइट और आतिशबाजी से पर्यावरण, वन्यजीवों और स्मारक संरक्षण कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। याचिका में इन गतिविधियों पर रोक लगाने तथा संबंधित टेंडर को निरस्त करने की मांग की गई है।
सूर्यास्त के बाद मनोरंजन गतिविधियों पर उठाया सवाल
22 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.बी. माथुर और अधिवक्ता मोहम्मद शोएब मिर्ज़ा ने न्यायालय के समक्ष राजस्थान स्मारक, पुरातात्विक स्थल एवं पुरावशेष नियम, 1968 का हवाला देते हुए कहा कि संरक्षित स्मारकों में सूर्यास्त के बाद किसी भी प्रकार की मनोरंजनात्मक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती।
राज्य सरकार ने दी यह जानकारी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि परिसर में रेस्टोरेंट संचालन के लिए जारी किया गया पूर्व टेंडर पहले ही समाप्त हो चुका है।
हाईकोर्ट का अंतरिम निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा एवं न्यायमूर्ति भुवन गोयल की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना विध्याधर का बाग परिसर के संबंध में कोई नया टेंडर जारी नहीं किया जाएगा।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 निर्धारित की है।
धरोहर संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
याचिकाकर्ता का कहना है कि न्यायालय का यह आदेश राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरों, वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनका मानना है कि इससे संरक्षित स्मारकों के व्यावसायिक उपयोग और संभावित दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.बी. माथुर के साथ अधिवक्ता मोहम्मद शोएब मिर्ज़ा ने पैरवी की।
















































