लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
भरतपुर। रीट भर्ती 2018 से जुड़े लंबित नियुक्ति विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। बयाना के हिंडौन रोड स्थित काराबारी-पीलूपुरा स्मारक स्थल पर आमरण अनशन कर रहे तीन अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ने से प्रशासन में हड़कंप मच गया। तीनों को पहले बयाना अस्पताल और बाद में जिला आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
अस्पताल में भर्ती अभ्यर्थी राजवीर गुर्जर ने बताया कि एमबीसी वर्ग के 372 पदों पर नियुक्ति को लेकर वे पिछले सात वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने लिखित में पद देने की बात स्वीकार की थी, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं मिली। कई बार धरना-प्रदर्शन और वार्ताओं के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने बताया कि पूर्व में कलेक्टर की समझाइश पर आंदोलन समाप्त किया गया था और 1 मई तक समाधान का आश्वासन मिला था। निर्धारित समयसीमा तक कार्रवाई नहीं होने पर अभ्यर्थियों ने 2 मई से दोबारा भूख हड़ताल शुरू कर दी। अनशन के चौथे दिन उनकी तबीयत बिगड़ने पर प्रशासन ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।
राजवीर गुर्जर ने कहा कि उन्हें इलाज नहीं, बल्कि अपनी मांगों का समाधान चाहिए। उन्होंने मांग की कि मंत्रियों और अधिकारियों की गठित समिति के साथ सीधी वार्ता कर समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।
इधर, अस्पताल में एडीएम प्रशासन घनश्याम शर्मा अभ्यर्थियों से मिलने पहुंचे और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। हालांकि अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
धरना स्थल पर मौजूद अन्य अभ्यर्थियों और गुर्जर समाज के लोगों ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। उल्लेखनीय है कि 8 अप्रैल को कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में 1 मई तक मंत्रीमंडलीय उपसमिति के साथ वार्ता कराने का भरोसा दिया गया था, जो पूरा नहीं हो सका।
चिकित्सकीय टीम के अनुसार तीनों अभ्यर्थियों का शुगर स्तर काफी गिर गया था, जिससे उन्हें चक्कर और कमजोरी की शिकायत हुई। फिलहाल तीनों का आरबीएम अस्पताल में इलाज जारी है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।






















































