लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
चौमहला (झालावाड़)। कस्बे में आचार्य जिनचंद्र हेमचंद्र सागर सुरीश्वरजी महाराज का शिष्य मंडल सहित भव्य मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री का नगर प्रवेश ओसवाल दाल मिल परिसर से बैंड-बाजों के साथ हुआ, जहां जैन श्रीसंघ द्वारा उनकी अगवानी की गई।
इस दौरान मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री का अक्षत और श्रीफल से स्वागत किया। विशेष बात यह रही कि कस्बे के निवासी रहे धर्मेश पिछोलिया, जो एक वर्ष पूर्व दीक्षित होकर अब महर्षि चंद्र सागर जी महाराज बने हैं, उनका भी दीक्षा के बाद प्रथम बार आगमन हुआ।
धर्मसभा में दिए संस्कारों पर जोर
जैन उपाश्रय में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि बच्चों में बचपन से ही धार्मिक संस्कार होना आवश्यक है, जिससे वे जीवनभर धर्म मार्ग पर अडिग रह सकें। उन्होंने कहा कि किसी भी जन्म में किया गया धर्म कार्य कभी व्यर्थ नहीं जाता, वह सदैव कल्याणकारी होता है।
मोबाइल से दूरी रखने की सीख
आचार्य श्री ने आधुनिक समय की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को मोबाइल, फेसबुक और इंस्टाग्राम से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर हजारों मित्र बन जाते हैं, लेकिन कठिन समय में परिवार ही साथ खड़ा रहता है, इसलिए परिवार के मूल्यों को समझना जरूरी है।
आगामी कार्यक्रम की जानकारी
आचार्य श्री की पावन निश्रा में 19 अप्रैल को पडासली तीर्थ में बनने वाले शत्रुंजय स्वरूप गिरिराज का शिला मुहूर्त कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें चौमहला जैन श्रीसंघ को आमंत्रित किया गया है।
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया और धार्मिक वातावरण बना रहा।























































