लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जैन समाज ने श्रद्धा और भक्ति के साथ समारोह मनाया
उनियारा (निर्मल गुप्ता)। श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सुथड़ा में जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर अभिनंदननाथ भगवान और पंद्रहवें तीर्थंकर धर्मनाथ भगवान का जन्म-तप कल्याणक महोत्सव भव्य रूप से मनाया गया।
प्रबंध समिति के अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराणा और गजानंद बड़जात्या ने बताया कि भगवान अभिनंदननाथ का जन्म अयोध्या में इक्ष्वाकुवंशी राजा संवर और माता सिद्धार्था के यहाँ माघ शुक्ल द्वादशी को हुआ था। उनका प्रतीक चिन्ह ‘बंदर’ और वर्ण स्वर्ण था। उन्होंने राजपाठ त्याग कर तपस्या की और कैवल्य ज्ञान प्राप्त कर सम्मेद शिखर से निर्वाण प्राप्त किया।
वहीं बसंत जैन और मनोज जैन बनेठा ने बताया कि भगवान धर्मनाथ का जन्म रत्नपुरी में राजा भानु और माता सुव्रता की कोख से माघ शुक्ल त्रयोदशी को इक्ष्वाकु वंश में हुआ। उनका प्रतीक चिन्ह ‘वज्र’ और वर्ण स्वर्ण था। उन्होंने भी राजपाठ त्यागकर तप किया और पौष शुक्ल पूर्णिमा को कैवल्य ज्ञान प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त किया।
शास्त्री प्रिंस जैन देवांश के निर्देशन में सर्वप्रथम मंगलाष्टक कर नित्य अभिषेक शांति धारा की गई। वार्षिक शांति धारा में रमेशचंद रौनक सर्राफ (जयपुर) और दिनेश कुमार, मुकेश कुमार बनेठा, बाबूलाल, कमल कासलीवाल (उनियारा) ने भाग लिया।
इसके बाद देव शास्त्र पूजा, चौबीस भगवान की मूलनायक पूजा, अभिनंदननाथ भगवान और धर्मनाथ भगवान की पूजा कर जन्म-तप कल्याणक महामहोत्सव मनाया गया।
भक्तामर संयोजक बसंत जैन और नरेंद्र जैन बनेठा ने बताया कि सांय 6:00 बजे श्रेष्ठी परिवार दिनेश कुमार, मुकेश कुमार, समेकित कुमार, पुलकित कुमार, अनंत कुमार बनेठा (जयपुर) एवं शुक्रवार भक्तामर अनुष्ठान मंडल (उनियारा) द्वारा भक्तामर दीपार्चना सानंद संपन्न की गई।
















































