लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
बजट 2026 से उम्मीदें: भीलवाड़ा–कुंवारिया (नाथद्वारा) नई रेल लाइन को मिले स्वीकृति
— सत्यनारायण सेन, गुरला
गुरला/गंगापुर/भीलवाड़ा।
देश आज आज़ादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में अमृत महोत्सव मना रहा है। केंद्र और राज्य में समान विचारधारा की डबल इंजन सरकार के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। ऐसे समय में मेवाड़-मारवाड़ क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक और औद्योगिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भीलवाड़ा से कुंवारिया (नाथद्वारा) वाया गुरला, गंगापुर, पोटला, कुरज नई रेल लाइन परियोजना का अब तक लंबित रहना क्षेत्रवासियों के लिए निराशाजनक है।
दो बार सर्वे, फिर भी नहीं मिली स्वीकृति
इस बहुप्रतीक्षित रेल लाइन का पूर्व में दो बार सर्वे हो चुका है, बावजूद इसके अब तक परियोजना को अंतिम स्वीकृति नहीं मिल पाई। पूर्व सांसद रामपाल उपाध्याय और पूर्व सांसद एवं रेल मंत्री सी.पी. जोशी के कार्यकाल में इस रेल लाइन का सर्वे कराया गया था, लेकिन रेल मंत्रालय में बदलाव के बाद यह परियोजना ठंडे बस्ते में चली गई।
पूर्व सांसद सुभाष बाहेड़िया एवं वर्तमान सांसद दामोदर अग्रवाल द्वारा भी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजे गए, परंतु अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है।
केवल 75 किलोमीटर की रणनीतिक रेल परियोजना
प्रस्तावित रेल लाइन की कुल लंबाई लगभग 75 किलोमीटर है। यह रेल लाइन मावली-मारवाड़ रेल मार्ग से जुड़कर उदयपुर, नाथद्वारा, राजसमंद, पाली, मारवाड़ जंक्शन और जोधपुर तक सीधी और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इससे भीलवाड़ा और राजसमंद जैसे दो महत्वपूर्ण जिलों को सीधा रेल नेटवर्क मिलेगा। वर्तमान में दोनों ही जिलों से सांसद केंद्र सरकार में सत्तारूढ़ दल से हैं।
पर्यटन को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
रेल लाइन के निर्माण से क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को सीधी रेल सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें प्रमुख रूप से—
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नाथद्वारा का श्रीनाथजी मंदिर
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कांकरोली का द्वारकाधीश मंदिर एवं राजसमंद झील
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हल्दीघाटी, बागेरी नाका
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गुरला का रणजीत सागर, कालिका माता मंदिर
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गंगापुर के गंगाबाईसा मंदिर, भरका माता, खजुरिया श्याम
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कारोई ज्योतिष नगरी, लेटे हुए सांवरिया हनुमानजी
शामिल हैं। इससे पर्यटन विकास के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
उद्योग और व्यापार को होगा सीधा लाभ
यह रेल लाइन राजसमंद के मार्बल उद्योग, भीलवाड़ा के वस्त्र उद्योग, गंगापुर क्षेत्र के मिनरल्स उद्योग और देशभर में व्यापार करने वाले गंगापुर क्षेत्र के आइसक्रीम व्यापारियों के लिए वरदान साबित होगी। मालगाड़ी संचालन बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी और क्षेत्रीय उद्योगों को राष्ट्रीय बाजार से सीधा लाभ मिलेगा।
48 वर्षों से लंबित मांग
रेलवे संघर्ष समिति के रामप्रसाद माली ने बताया कि यह देश की सबसे पुरानी लंबित रेल लाइन मांगों में से एक है, जिसकी मांग पिछले 48 वर्षों से की जा रही है। राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह परियोजना आज तक स्वीकृत नहीं हो सकी।
सांसद को सौंपा गया ज्ञापन
क्षेत्रवासियों ने पुनः प्रयास करते हुए भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल को नई रेल लाइन की मांग का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से आग्रह किया कि वे रेलवे स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य होने के नाते इस परियोजना को प्राथमिकता दिलाकर पुनः सर्वे और शीघ्र स्वीकृति सुनिश्चित कराएं।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में रामप्रसाद माली (गंगापुर), सत्यनारायण सेन (गुरला), कन्हैयालाल माली, बंशीलाल रेगर, कालूलाल माली (गंगापुर) शामिल रहे।
क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि बजट 2026 में इस बहुप्रतीक्षित रेल परियोजना को मंजूरी मिलेगी और यह क्षेत्र के समग्र विकास, रोजगार सृजन और राष्ट्रीय कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।















































