लोक टुडे न्यूज नेटवर्क
भजन संध्या और कच्छी घोड़ी नृत्य रहे आकर्षण का केंद्र
उनियारा (सत्यप्रकाश मयंक)। आस्था और परंपरा के संगम का प्रतीक लोक देवता देहलवाल जी महाराज का तीन दिवसीय मेला मंगलवार रात भजन संध्या और कच्छी घोड़ी नृत्य के साथ संपन्न हुआ।
भजन संध्या में झूमे श्रद्धालु
मेले के अंतिम दिन पूर्व रात्रि को मंदिर प्रांगण में अलगोजा भजन संध्या का आयोजन हुआ। आयोजकों हरिओम जांगिड़, दीपक जांगिड़, रमेश सैनी, रामसहाय गुर्जर और मुकेश गुर्जर ने बताया कि रवाजना डूंगर के कलाकारों ने अलगोजा की धुन पर तेजाजी के भजनों की प्रस्तुतियां दीं।
अलगोजा, ढोलकी और मजीरों की संगत में प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे।
कच्छी घोड़ी नृत्य बना आकर्षण
आयोजन में सत्यनारायण चौकीदार करवर द्वारा कच्छी घोड़ी नृत्य और डांसर नैना कोटा द्वारा शानदार नृत्य प्रस्तुत किया गया। दर्शक तालियों से उत्साहवर्धन करते रहे। महिलाओं ने भी पारंपरिक गीतों और नृत्यों में सक्रिय भागीदारी की।
आसपास के गांवों से उमड़े श्रद्धालु
भजन संध्या और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने के लिए उनियारा, भीमगंज नाहरा, झोपड़ियां सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
मेले से बढ़ती है आस्था और भाईचारा
मेले के दौरान देहलवाल सेवा समिति ने उत्तम व्यवस्थाएं कीं, जिसकी सभी ने सराहना की। समिति सदस्यों ने कहा कि “मेले हमारी संस्कृति और सभ्यता के परिचायक हैं। इनसे न केवल आस्था गहरी होती है बल्कि समाज में प्रेम और भाईचारा भी बढ़ता है।”