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सीकर में प्रभारी मंत्री शर्मा ने बैठक से पत्रकारों निकाला बाहर, भाजपा पदाधिकारी अंदर

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

फिर लोकतंत्र का ढोंग क्यों?

पत्रकारों को मीटिंग से बाहर जाने को कहा, विरोध में मीडिया ने किया बहिष्कार
सरकारी कार्यक्रमों में भाजपा पदाधिकारियों की मौजूदगी पर उठे सवाल

सीकर में जिले के प्रभारी मंत्री  संजय शर्मा  की कार्यशैली को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। कलेक्ट्रेट में आयोजित सरकारी बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री ने “सरकारी बैठक” का हवाला देते हुए पत्रकारों को बाहर जाने के लिए कह दिया। लेकिन जैसे ही पत्रकारों ने देखा कि बैठक में भाजपा पदाधिकारी और अन्य लोग आराम से मौजूद हैं, तो मामला गरमा गया।

पत्रकारों ने प्रभारी मंत्री के सामने ही इसका तीखा विरोध जताया और सवाल दाग दिया कि अगर यह पूरी तरह सरकारी बैठक थी तो फिर भाजपा पदाधिकारियों को किस अधिकार से बैठाया गया? जवाब में प्रभारी मंत्री ने कहा कि सरकारी बैठकों में भाजपा पदाधिकारियों के बैठने का “पुराना चलन” रहा है।

यहीं पत्रकारों का गुस्सा और बढ़ गया। पत्रकारों ने साफ कहा कि जब वर्षों से कलेक्ट्रेट की बैठकों में मीडिया भी हिस्सा लेता आया है, तो अचानक पत्रकारों को बाहर निकालने का फैसला क्यों? आखिर सरकार पारदर्शिता से डर क्यों रही है?

विवाद इतना बढ़ा कि नाराज़ पत्रकारों ने प्रभारी मंत्री की बैठक का बहिष्कार कर दिया। जिलेभर के पत्रकारों में इस व्यवहार को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला। मीडिया जगत का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

मामला यहीं नहीं रुका। पत्रकारों ने प्रभारी मंत्री के दोहरे रवैये पर भी सवाल उठाए। कुछ समय पहले अपनी एस्कॉर्ट में शामिल एक पुलिसकर्मी द्वारा गाड़ी स्टार्ट करने पर फटकार लगाने वाले प्रभारी मंत्री खुद अब एस्कॉर्ट और पार्टी पदाधिकारियों के लंबे काफिले के साथ सरकारी कार्यक्रमों में भाग लेते नजर आ रहे हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या जिले में सरकारी संसाधनों और पेट्रोल-डीजल की बचत केवल भाषणों तक सीमित है? जब देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi लगातार पेट्रोल-डीजल बचाने और फिजूलखर्ची रोकने की बात करते हैं, तब सरकारी कार्यक्रमों में बढ़ते काफिले और राजनीतिक जमावड़े क्या उसी संदेश की धज्जियां नहीं उड़ा रहे?

सीकर में हुई इस घटना ने सरकार की कार्यशैली, पारदर्शिता और मीडिया के प्रति रवैये पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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