सुखदेव महाराज के नेतृत्व में आध्यात्मिक ज्ञान योग प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

– संत श्रीदादूदयाल आश्रम श्रीसुखसागर सेवा धाम में आयोजन

किशनगढ़ रेनवाल। (नवीन कुमावत )श्रीसुखसागर सेवा धाम के संस्थापक श्रीसुखदेवजी महाराज ने कहा कि किसी भी संगठन की पहचान साधकों के सदगुण, श्रेष्ठ कर्म एवं उत्कृष्ट व्यवहार से होती है, अतः स्वयं का निरंतर निरीक्षण, प्रशिक्षण एवं शिक्षण अति आवश्यक है। महाराजजी ने कहा कि इस सनातन राष्ट्र ने पुरातन काल से ही त्याग,बलिदान,सेवा समर्पण करने वाले लोगों को ही आदर्श माना है। अतः हमारा जीवन औरों के लिए उदाहरण बनें, ऐसा जीवन जिए।

ये बात उन्होंने श्री दादूदयाल आश्रम सुखसागर सेवा धाम में आयोजित पंच दिवसीय आध्यात्मिक ज्ञान योग प्रशिक्षण शिविर के समापन के मौके पर उपस्थित प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कही।

गौरतलब है कि निकटवर्ती मुंडियागढ़ गांव स्थित संत श्रीदादूदयाल आश्रम श्रीसुखसागर सेवा धाम में संस्थापक श्रीसुखदेव जी महाराज के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में ही ये आध्यात्मिक ज्ञान योग प्रशिक्षण शिविर चल रहा था। इसका समापन सत्र समाजसेवी एवं भामाशाह पन्नालाल कुमावत मींडा (इंदौर) की अध्यक्षता में हुआ। सत्संग प्रमुख बन्नू भारती ने काव्य गीत प्रस्तुत किया।

शिविर में बौद्धिक एवं मानसिक विकास की दृष्टि से समाजसेवी मनोज गंगवाल नांवा, गौमित्र मंडल अध्यक्ष रेनवाल ग्यारसीलाल प्रजापत, एडवोकेट रक्षपाल जयपुर, कमल जैन रेनवाल, युवा संत गिरधारी महाराज, आराधना फाउंडेशन रेनवाल के निदेशक भरत कुमावत, धर्मेंद्र महाराज गुढा साल्ट, डॉ कमलेश कुमार शर्मा

एसोसिएट प्रोफेसर

आयुर्वेद महाविद्यालय जयपुर, श्याम गुरुजी खाटूश्याम, हेमराज रेनवाल ने भी अपने विचारों से देशभक्ति एवं नवऊर्जा का संचार किया। शारीरिक शिक्षण में मुख्य शिक्षक जयप्रकाश मंढ़ा, पुरुषोत्तम इंदौर, रूपनारायण सांभर, रोहित सांभर, पर्यवेक्षक राजकुमार इंदौर, लक्की आष्टी आदि की सहभागिता सराहनीय रही। योग प्राणायाम सत्र में पतंजलि से योगाचार्य प्रभुदयाल मदनगंज किशनगढ़ ने योगासन अभ्यास के साथ स्वस्थ तन, मन, जीवन के सूत्र बताएं। सेवानिवृत्त शिक्षिका विद्या देवी जयपुर ने “*दिशा योग एवं उसकी महत्ता”* पर प्रकाश डाला। आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षक मोहित शर्मा जयपुर ने सूर्य नमस्कार की बारीकियां और उसके लाभ बताएं। शिविर में बंसी इंदौर, बाबूलाल अध्यापक, नागरमल मंढ़ा, तरुभारती इंदौर, बाबूलाल, रामस्वरूप मारेठिया, मुरलीमोहन नागा नासिक, आदेश चौधरी मूंडियागढ़, मुकेश बागड़ा नांदरी, मुकेश इंदौर, रामेश्वर रामगढ़, हीरालाल मींडा, मालीराम यादव, रामकिशोर रेनवाल आदि की गरिमामय उपस्थिति रही।

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