ऋण वसूली अधिकरण जयपुर की विशेष लोक अदालत में 450 से अधिक मामलों का निस्तारण

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

ऋण वसूली अधिकरण ने  की लगभग 300 करोड़ से ज्यादा की वसूली
जयपुर। ऋण वसूली अधिकरण (DRT), जयपुर द्वारा लाल कोठी स्थित कार्यालय परिसर में 8 मई को आयोजित विशेष लोक अदालत में बड़ी सफलता हासिल हुई। इस लोक अदालत में सभी बैंकों एवं एन.बी.एफ.सी ने काफी उत्साहित होकर हिस्सा लिया। एक ही दिन में लगभग 550 से अधिक प्रकरणों का निस्तारण किया गया, जिससे करीब 300 करोड़ रुपए से अधिक की वसूली संभव हो सकेगी।
माननीय पीठासीन अधिकारी श्री विमल गुप्ता ने इस सफलता का श्रेय ऋण वसूली अधिकरण बार काउंसिल, जयपुर, पैनल में शामिल न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, बैंक अधिकारियों और पक्षकारों के सहयोग को दिया। उन्होंने बताया कि इस लोक अदालत के लिए करीब 3 हजार मामलों को सूचीबद्ध किया गया था, जिनमें से बड़ी संख्या में मामलों का आपसी सहमति से समाधान किया गया।
लोक अदालत की प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाए रखने के लिए तीन अलग-अलग पैनल (बेंच) गठित किए गए थे। प्रथम बेंच की अध्यक्षता माननीय पीठासीन अधिकारी श्री विमल गुप्ता ने की, जिसमें तनिषा खुबचंदनानी और ओ.पी. मिश्रा सदस्य रहे। द्वितीय बेंच में पूर्व पीठासीन अधिकारी मदनानी के साथ विक्रम जैन और निधि बिस्सा सदस्य रहे। तृतीय बेंच की अध्यक्षता सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश हरिंदर सिंह ने की, जिसमें सी.पी. शर्मा और अदिति स्वामी सदस्य के रूप में शामिल थे।
सुबह 10 बजे से शुरू हुई सुनवाई देर शाम तक जारी रही। इस दौरान पक्षकारों और बैंकों के बीच समझौते के जरिए मामलों का निस्तारण किया गया। पीठासीन अधिकारी ने DRT बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कीर्ति कपूर, महासचिव राजकुमार, अनिल शर्मा संयोजक, डीआरटी लोक अदालत जयपुर सहित सभी अधिवक्ताओं, बैंक अधिकारियों और सहयोग करने वाले पक्षकारों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि DRT जयपुर द्वारा यह दूसरी लोक अदालत आयोजित की गई है। इससे पहले आयोजित पहली लोक अदालत में 290 से अधिक मामलों का निस्तारण हुआ था और लगभग 250 करोड़ रुपए की वसूली संभव हुई थी। इसी सफलता को देखते हुए इस बार पुनः लोक अदालत आयोजित की गई।
यह विशेष लोक अदालत सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों तथा राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की अनुमति के तहत आयोजित की गई थी। मामलों को अधिवक्ताओं, वादकारियों और अन्य हितधारकों के अनुरोध पर सूचीबद्ध किया गया था।

 

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