रिफाइनरी लोकार्पण को लेकर की गई जल्दबाजी -गहलोत

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

रिफाइनरी लोकार्पण को लेकर की गई जल्दबाजी पर प्रतिक्रिया :

जयपुर । पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत में एक्स पर ट्वीट कर कहा की ऊपर वाला जानता है कि रिफाइनरी कब चालू होगी। इसकी तो जांच होनी चाहिए कि प्राइम मिनिस्टर के आने में चौबीस-छत्तीस घंटे बाकी थे, उसके पहले आप ट्रायल कर रहे हो। प्राइम मिनिस्टर का प्रोग्राम बन जाए, आप उस वक्त ट्रायल कर रहे हो। इसका मतलब कहीं न कहीं तो स्थिति ऐसी थी कि रिफाइनरी पूरी बनी नहीं होगी। आप धोखा क्यों दे रहे हो पब्लिक को? हमने जवाब दिया कि भाई हमने वादा किया कि चौबीस के अंदर दिसंबर में चालू हो जाएगी, मेरे वक्त में वादा किया हमने। पच्चीस भी गुजर गया, दबाव में प्रोग्राम बना लिया होगा, यह मुख्यमंत्री को देखना चाहिए था कि मैं प्राइम मिनिस्टर को बुला रहा हूं उसके पहले मेरा काम पूरा हुआ कि नहीं हुआ। तीन दौरे वह पहले करते। चीफ सेक्रेटरी बाद में भाग कर जा रहे हैं। तमाम अधिकारी बाद में गए, जैसे कोई चीफ गेस्ट के साथ में वो अटेंडेंस करने गए हों, उनको चाहिए पहले जाते, पूरी ट्रायल हुई कि नहीं देखते, वरना वो प्रोग्राम करते नहीं उस वक्त में। बड़ी बेइज्जती हुई राजस्थान की, पीएम का प्रोग्राम आया है, उसके पहले आग लग जाए वहां पर, इससे बड़ी शर्म की बात क्या होगी?

मीडिया द्वारा कहने कि क्लोजर को लेकर जनता परेशान है, नीट पेपर लीक संबंधी प्रश्न, के उत्तर में :

देखो मंत्री के बारे में कोई कमेंट इसलिए नहीं करूंगा कि अभी दो साल बाद भी उनकी पहचान नहीं बन पाई। जो मंत्री की पहचान होनी चाहिए ना जिससे वो जाएं तो काम शुरू हो जाए, अगर वो जाते भी हैं, उनकी बात सुनाई होती नहीं अधिकारी को। ये शिकायत आम मंत्रियों की है, मुख्यमंत्री जी से, जहां तक मुझे इत्तला है कि मंत्री कुछ परेशान हैं। हम फोन करते हैं, डिप्टी सीएम तक, हम फोन करते हैं, हमारे खुद के डिपार्टमेंट के अधिकारी फोन उठाते नहीं। ये स्थिति है यहां राजस्थान की, कैसे काम होगा? अब नीट का पेपर आउट हुआ, पहले वो ओएमआर शीट में पूरी बदनामी हुई गवर्नमेंट की। हमें बदनाम कर रहे हैं अभी तक, हमारे वक्त में एक पेपर आउट हो गया, अरेस्ट कर ली, हमने अरेस्ट करवाया। जो जेल में है आज आरपीएससी मेंबर, हमने अरेस्ट हमारे वक्त में करवाया। जेजेएम की बात करते हैं वो केस हमने दर्ज किया है जिसमें ये लोग बंद हैं आज, केस हमारे वक्त में दर्ज हुआ। अरेस्ट हमारे वक्त में शुरू हो गई थी। ये क्या श्रेय लेते हैं? खाली मीडिया उनके साथ में है। आप लोग दबाव में हैं। आप तो जाते हो पर आपकी कितनी चलती होगी डिपार्टमेंट में मुझे डाउट लगता है। पता नहीं कितना कर पाते होगे, आपका एडिटर है, उसका बॉस है, मालिक है। मालिक से भी ऊपर मुख्यमंत्री है, सीएमओ है और सीएमओ के प्रेस एडवाइजर हैं। वो कहां-कहां जवाब दें पीएमओ को, सीएमओ ।

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