लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
चार साल बाद भी स्थायी व्यवस्था नहीं होने पर राजस्थान हाईकोर्ट की नाराजगी, 21 जुलाई तक समयबद्ध योजना मांगी
जोधपुर |
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य की पंजीकृत गौशालाओं में पेयजल संकट को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि वर्ष 2023-24 के बजट में घोषणा के बावजूद चार वर्षों बाद भी गौशालाओं में स्थायी पेयजल व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। कोर्ट ने सरकार को 15 दिन के भीतर वित्त विभाग से अनुमोदित समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने गो ग्राम सेवा संघ, बीकानेर की जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया।
2,220 गौशालाओं में नहीं है स्थायी पेयजल व्यवस्था
कोर्ट में पेश रिकॉर्ड के अनुसार, राजस्थान में 3,861 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं। इनमें 1,641 गौशालाओं में ट्यूबवेल उपलब्ध हैं, जबकि 2,220 गौशालाओं में अब भी स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं है।
सरकार ने अदालत को बताया कि 740 गौशालाएं सबसे अधिक संकटग्रस्त हैं, जहां तत्काल पेयजल अवसंरचना विकसित करने की आवश्यकता है। इसके लिए तीन चरणों में कार्ययोजना तैयार की गई है।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
खंडपीठ ने कहा कि वर्ष 2022 से लगातार आदेश दिए जा रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान लागू नहीं किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। सरकार को दीर्घकालीन और स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया अवमानना की कार्रवाई बनती है, लेकिन सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को देखते हुए फिलहाल इस पर निर्णय टाल दिया गया है।
21 जुलाई तक पेश करनी होगी कार्ययोजना
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि—
- 21 जुलाई 2026 तक वित्त विभाग से स्वीकृत समयबद्ध कार्ययोजना अदालत में पेश की जाए।
- योजना का क्रियान्वयन तीन माह के भीतर शुरू किया जाए।
- 1 अक्टूबर 2026 से पहले कार्य प्रारंभ करने का प्रयास किया जाए।
याचिकाकर्ता के सुझावों पर भी होगा विचार
अदालत ने सरकार को याचिकाकर्ता के सुझावों पर भी विचार करने को कहा है। इनमें आवश्यकता वाले क्षेत्रों में सिंगल फेज बिजली कनेक्शन देकर ट्यूबवेल शीघ्र शुरू करना, मानसून तक अस्थायी पेयजल व्यवस्था जारी रखना तथा जहां भूजल उपलब्ध नहीं है वहां पाइपलाइन या अन्य वैकल्पिक जल स्रोत विकसित करना शामिल है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने वित्त विभाग के सचिव को भी मामले में पक्षकार बनाया है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें सरकार को विस्तृत प्रगति रिपोर्ट और कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी।














































