लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर। (रितु मेहरा) राजस्थान हाईकोर्ट ने करौली जिले के पांचना बांध से सिंचाई नहरों में 15 दिनों के भीतर पानी छोड़ने का निर्देश देते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा कि उसके पहले दिए गए आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया, जो गंभीर चिंता का विषय है।
सरकार की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि जब पहले ही पानी छोड़ने के आदेश दिए जा चुके थे, तो अब तक उनका पालन क्यों नहीं किया गया। अदालत ने प्रशासन की निष्क्रियता पर असंतोष व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि 15 दिन के भीतर पांचना बांध से कमांड एरिया की सिंचाई नहरों में पानी छोड़ा जाए।
किसानों की लंबे समय से थी मांग
सवाई माधोपुर के कमांड एरिया के किसान लंबे समय से नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर सिंचाई का पानी नहीं मिलने से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है और हजारों किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी मांग को लेकर पिछले कई दिनों से आंदोलन और धरने भी चल रहे थे।
क्या है पूरा विवाद?
पांचना बांध के पानी को लेकर करौली और सवाई माधोपुर के किसानों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है।
- सवाई माधोपुर के कमांड एरिया के किसान चाहते हैं कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार नहरों में पानी छोड़ा जाए ताकि सिंचाई हो सके।
- वहीं करौली के डूब क्षेत्र के 39 गांवों के लोग बांध का पानी पहले अपने क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बांध निर्माण के दौरान उनकी जमीनें डूब क्षेत्र में चली गई थीं, इसलिए पानी पर उनका पहला अधिकार है।
पहले भी हो चुका है न्यायिक हस्तक्षेप
यह पहली बार नहीं है जब अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है। पिछले करीब दो दशकों में कई बार न्यायालय ने पानी छोड़ने के निर्देश दिए, लेकिन विभिन्न कारणों से उनका पूर्ण पालन नहीं हो सका। इसी वजह से विवाद लगातार बना हुआ है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब राज्य सरकार पर 15 दिनों के भीतर आदेश की पालना सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ गया है। यदि समय सीमा में पानी नहीं छोड़ा गया तो अदालत आगे कड़ा रुख अपना सकती है।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें राज्य सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि अदालत के निर्देशानुसार निर्धारित समय में नहरों में पानी छोड़ा जाता है तो सवाई माधोपुर के किसानों को खरीफ सीजन में राहत मिल सकती है। वहीं सरकार को करौली और सवाई माधोपुर दोनों पक्षों के हितों के बीच संतुलन बनाकर स्थायी समाधान भी तलाशना होगा।















































