राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ कार्यक्रम का आयोजन

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

कोटा, (विजय कपूर)। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय कोटा ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की 10वी वर्षगाँठ पर समाज में जागरूकता बढ़ाने और बालिकाओं की शिक्षा एवं सुरक्षा को प्रोत्साहन देने के लिए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत गोद लिए गए गावों गामच और विजय नगर, तहसील – तालेड़ा में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए।आरटीयू के सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया की विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी रिस्पांसिबिलिटी सेल ने अपने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत इन गांवों में बालिकाओं की शिक्षा और अधिकारों को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए रैलिया, नुक्कड़ नाटक और विभिन्न संवाद सत्रों का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य गोद लिए गए गांवों में लैंगिक असमानता को कम करना और समाज में बेटियों के महत्व को रेखांकित करना है। आयोजित कार्यक्रम के अंतर्गत जागरूकता रैली का आयोजन किया गया जिसमे ग्रामीण क्षेत्रों में राष्ट्रीय कैडेट कोर और आरटीयू ड्रामा क्लब के छात्रो और शिक्षकों ने मिलकर रैली निकालकर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया। बालिका शिक्षा और प्रौढ शिक्षा पर विशेषज्ञों ने संवाद किए एवं प्रेरक कहानियों के माध्यम से ग्रामीणों में जन जागरूकता का प्रयास किया गया। इस अभियान ने ग्रामीण समुदायों में सकारात्मक प्रभाव डाला है। ग्रामीणों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए सहयोग का आश्वासन दिया।कुलपति प्रो. एसके सिंह ने कहा की यह कार्यक्रम मात्र एक अभियान नहीं, बल्कि समाज को बेहतर दिशा देने का प्रयास है।

हमें गर्व है कि हम बेटियों के अधिकार और शिक्षा के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान लैंगिक भेदभाव को दूर करने और बालिकाओं को सशक्त बनाने की दिशा में सराहनीय कदम है। यह अभियान लैंगिक भेदभाव को दूर करने के सन्देश के साथ बालिकाओं को शिक्षा और अपने सपनों को पूरा करने के असीमित अवसर प्रदान करेगा। आरटीयू के जागरूकता अभियानों ने ग्रामीणों में लैंगिक समानता के महत्व की गहरी समझ पैदा की है और ऐसे जन कल्याणकारी अभियानों को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाया है। हम सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे की अपनी बेटियों के अधिकारों की रक्षा और उनकी शिक्षा सुनिश्चित करें और एक ऐसा समाज बनाएं जहां वे बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ सकें। आरटीयू का यह सामाजिक प्रयास बेटियों के लिए और भी अधिक प्रगति और सामाजिक अवसर लेकर आएगा।

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