लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
सेवन डेज स्मार्ट एकेडमी बनी क्षेत्र की पहली सीबीएसई मान्यता प्राप्त सीनियर सेकेंडरी स्कूल
नावां (नागौर)। शिक्षा के क्षेत्र में नावां शहर ने नया इतिहास रच दिया है। अब तक जहां सीबीएसई बोर्ड की पढ़ाई के लिए छात्रों को 40–50 किलोमीटर दूर कुचामन, फुलेरा, मकराना या जयपुर-अजमेर जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था, वहीं अब नमकनगरी नावां में ही राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध होगी।
नई दिल्ली स्थित केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने श्री राधे एजुकेशन ग्रुप द्वारा संचालित सेवन डेज स्मार्ट एकेडमी को कक्षा 12वीं तक की मान्यता प्रदान की है। इस प्रकार यह स्कूल नावां उपखंड का पहला सीबीएसई से मान्यता प्राप्त सीनियर सेकेंडरी स्कूल बन गया है।
अभिभावकों और छात्रों के लिए राहत की खबर
अब क्षेत्र के अभिभावकों को अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूर शहरों में भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। हॉस्टल और पीजी के खर्च से मुक्ति मिलने के साथ ही बच्चों को मानसिक व शारीरिक थकान से भी राहत मिलेगी।
अब छात्र अपने ही शहर में रहकर राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स—तीनों संकायों में शिक्षा
संस्थान के सचिव ने बताया कि विद्यालय में कक्षा 12वीं तक विज्ञान, कला और वाणिज्य तीनों संकायों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षा दी जाएगी।
स्कूल में अनुभवी शिक्षकों द्वारा आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के साथ पढ़ाई कराई जाएगी। साथ ही विद्यालय में प्रयोगशालाएँ, डिजिटल क्लासरूम, पुस्तकालय, खेल सुविधाएँ और स्मार्ट टीचिंग उपकरणों से सुसज्जित वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण एवं शहरी छात्रों को बड़े शहरों जैसी सुविधाएँ मिल सकें।
श्री राधे एजुकेशन ग्रुप की नई पहल
ग्रुप ने पूर्व में छोटे बच्चों के लिए “बचपन प्ले स्कूल” की स्थापना की थी, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रसिद्ध है।
अब उसी श्रंखला को आगे बढ़ाते हुए समूह ने सीबीएसई पैटर्न पर आधारित सीनियर सेकेंडरी स्कूल को मान्यता दिलाई है।
वर्तमान में विद्यालय वर्ष 2022 से 8वीं कक्षा तक संचालित है, जबकि शैक्षणिक सत्र 2026–27 से इसे कक्षा 12वीं तक पूर्ण सुविधाओं के साथ प्रारंभ किया जाएगा।
नावां में शिक्षा का नया अध्याय
श्री राधे एजुकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी की टीम ने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ एक संस्था की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की है।
इससे ग्रामीण और शहरी दोनों वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर प्राप्त होंगे और वे राष्ट्रीय व प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कर सकेंगे।
अब नमकनगरी नावां केवल नमक उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में भी पहचानी जाएगी — यही इस पहल का लक्ष्य है।
