लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
– पूर्वी राजस्थान के गांवों में सीएम के सीधे जनसंवाद को देखकर बाड़मेर और जैसलमेर जिलों की ढाणियों के लोगों को मुख्यमंत्री दौरे का इंतजार, दशकों पुरानी समस्याए जस की तस, अब जगी उम्मीद की ‘किरण’
मनोहरसिंह खोखर। जयपुर
पूर्वी राजस्थान के धुआंधार दौरों और ईआरसीपी के जरिए जल क्रांति की अलख जगाने के बाद अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मारवाड़ क्षेत्र और सरहदी जिलों के ग्रामीणों की उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं। थार के रेगिस्तान से अब एक ही सुर गूंज रहा है – “मुख्यमंत्री जी, हमारे यहां भी आओ !” इस हिस्से के भी मुख्यमंत्री आप ही हो और हमें आपसे अपार उम्मीदें है। क्योंकि यह क्षेत्र खासकर बाड़मेर और जैसलमेर जो दूरस्थ रेत के धोरों में फैला है, जहां दशकों से बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। इससे पहले आप जैसे संवाद और चौपालें देखने को नहीं मिली, लेकिन अब हमें आपसे खास आस बन गई है।
पूर्वी राजस्थान के गांवों में सीएम के सीधे जनसंवाद को देखकर अब बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सीमावर्ती जिलों की ढाणियों में रहने वाले लोग पलकें बिछाए मुख्यमंत्री के दौरे का इंतजार कर रहे हैं।
मारवाड़ की पुकार : धोरों तक पहुंचे सीधे जनसंवाद :
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पिछले कुछ समय से पूर्वी राजस्थान के जिलों में लगातार एक्टिव हैं, जिससे वहां विकास योजनाओं को नई रफ्तार मिली है। इसी तर्ज पर अब मारवाड़ क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि जब सूबे के मुखिया खुद धरातल पर आते हैं, तो बरसों से अटकी फाइलें मिनटों में क्लियर होती हैं। बाड़मेर-जैसलमेर के सुदूर सरहदी गांवों के लोग चाहते हैं कि मुख्यमंत्री राजधानी से निकलकर सीधे रेतीले धोरों के बीच चौपाल लगाएं, ताकि सीमावर्ती इलाकों की जमीनी हकीकत और जनता का दर्द सीधे उन तक पहुंच सके।
बाड़मेर-जैसलमेर की मुख्य मांगें, जिन पर टिकी हैं नजरें :
बाड़मेर और जैसलमेर जिलों के ग्रामीणों के पास मुख्यमंत्री के सामने रखने के लिए प्राथमिकताओं की एक लंबी फेहरिस्त है।
– रिफाइनरी और स्थानीय रोजगार : पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट के आसपास के गांवों के युवा चाहते हैं कि उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार के पुख्ता अवसर मिलें।
– सौर ऊर्जा हब का लाभ : जैसलमेर में एशिया का सबसे बड़ा सोलर और विंड एनर्जी हब बन रहा है, लेकिन स्थानीय गांवों को अभी भी निर्बाध बिजली और सीएसआर फंड के तहत विकास का इंतजार है।
– सरहदी पेयजल संकट : गर्मी की शुरुआत के साथ ही इंदिरा गांधी नहर परियोजना के टेल एंड (आखिरी छोर) पर बसे बाड़मेर-जैसलमेर के गांवों में पानी की किल्लत बढ़ जाती है, जिसके स्थायी समाधान की मांग ग्रामीण सीधे सीएम से करना चाहते हैं।
– मजबूत कनेक्टिविटी : भारत-पाक सीमा से सटे गांवों को मुख्य जिला मुख्यालयों और मंडियों से जोड़ने के लिए सड़कों के सुदृढ़ीकरण की जरूरत है।
“जब मुखिया कदम रखता है, तो सुधरती है प्रशासनिक व्यवस्था” :
मारवाड़ के वरिष्ठ ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे की आहट मात्र से ही पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर आ जाता है। बाड़मेर की ‘चौहटन’ से लेकर जैसलमेर की ‘सम’ और ‘पोकरण’ विधानसभा के दूर-दराज गांवों के लोग इस आस में हैं कि सीएम का कारवां जल्द ही जयपुर से मरुधरा के इस हिस्से की ओर कूच करेगा। पूर्वी राजस्थान में विकास का रोडमैप तैयार करने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मारवाड़ के इन सरहदी जिलों की ‘पुकार’ पर कब मुहर लगाते हैं और थार के धोरों का दौरा कर पश्चिमी राजस्थान को क्या सौगातें देते हैं।
पच्छिमी राजस्थान के जिले दूसरे जिलों की तुलना में काफी पिछड़े :
– बाड़मेर : क्षेत्रफल में बहुत बड़ा, सुदूर ढाणियों में पानी-बिजली का गंभीर संकट। बॉर्डर इलाके में शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था भी सुदृढ़ नहीं है।
– जैसलमेर: देश का सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाला जिला, कठिन रेतीले धोरे, पानी के लिए मीलों का सफर और खराब कनेक्टिविटी।
– बालोतरा : नवसृजित जिला प्रदूषण की मार झेल रहा है। रिफाइनरी के बावजूद स्थानीय रोजगार का अभाव।
– जोधपुर: इस क्षेत्र का मुख्य केंद्र, लेकिन इसके ग्रामीण और संभाग के अंतर्गत आने वाले दूर-दराज के इलाके आज भी पिछड़ेपन से जूझ रहे हैं।
– बीकानेर: अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा जिला, जहाँ के ग्रामीण अंचलों में सिंचाई और पेयजल की भारी किल्लत रहती है।
– जालौर: साक्षरता दर (विशेषकर महिला साक्षरता) के मामले में राज्य के सबसे पिछड़े जिलों में शुमार।
– पाली: औद्योगिक प्रदूषण (कपड़ा उद्योग) और भूजल स्तर में भारी गिरावट की मार झेल रहा क्षेत्र।
