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कर्नाटक का ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’: क्या दिल्ली दरबार में तय हो गई डीके शिवकुमार की ताजपोशी?

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

नितिन मेहरा | वरिष्ठ संवाददाता, राजस्थान

बेंगलुरु / नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों सत्ता परिवर्तन की अटकलों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। सत्ता के गलियारों में चल रही चर्चाओं के बीच संकेत मिल रहे हैं कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जल्द बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकते हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार गुरुवार को घटनाक्रम तेजी से बदल सकता है, जिसे कांग्रेस के अंदर बड़े सत्ता परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।

दिल्ली की बैठक में क्या बनी रणनीति?

मंगलवार को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में हुई लंबी बैठक में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने कर्नाटक नेतृत्व को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार बैठक में सत्ता संतुलन और भविष्य की रणनीति पर मंथन हुआ।

सम्मानजनक राष्ट्रीय भूमिका की तैयारी

चर्चा है कि सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है। उन्हें राज्यसभा भेजकर कांग्रेस 2029 लोकसभा चुनावों से पहले एक मजबूत ओबीसी चेहरे के रूप में पेश करना चाहती है।

बेटे यतींद्र के लिए भूमिका तय होने की चर्चा

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सत्ता परिवर्तन की स्थिति में सिद्धारमैया खेमे ने उनके बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के लिए नई सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी की मांग रखी है।

दलित चेहरे का विकल्प भी चर्चा में

सूत्रों के मुताबिक सिद्धारमैया ने आलाकमान के सामने यह सुझाव भी रखा है कि यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है तो सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए किसी दलित चेहरे को भी आगे लाने पर विचार किया जाए। इस संदर्भ में जी. परमेश्वर का नाम चर्चा में बताया जा रहा है।

क्या अब डीके शिवकुमार की बारी?

कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से संगठनात्मक मजबूती के केंद्र रहे डीके शिवकुमार के समर्थकों में उत्साह का माहौल है। वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली बड़ी जीत के बाद से ही ‘ढाई-ढाई साल’ के सत्ता फार्मूले की चर्चा होती रही है।

डीके शिवकुमार खेमे का मानना है कि अब नेतृत्व परिवर्तन का समय आ गया है और पार्टी को संगठन तथा सरकार दोनों में संतुलन स्थापित करना चाहिए।

⚡ सियासी हलकों में क्या चर्चा?

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया समर्थक विधायक संख्या बल के जरिए अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं, जबकि डीके शिवकुमार खेमे को केंद्रीय नेतृत्व का समर्थन मिलने की चर्चाएं तेज हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि दिल्ली बैठक में केवल राज्यसभा चुनाव और संगठनात्मक विषयों पर चर्चा हुई।

☕ ‘ब्रेकफास्ट पॉलिटिक्स’ पर सबकी नजर

गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री आवास पर प्रस्तावित मंत्रियों और समर्थक विधायकों की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक आगे की रणनीति तय करने और शक्ति प्रदर्शन का संकेत हो सकती है।

बॉटम लाइन

कांग्रेस भले इसे सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बता रही हो, लेकिन विपक्षी दल इसे पार्टी के अंदर नेतृत्व संघर्ष के रूप में पेश कर रहे हैं। अब निगाहें गुरुवार के घटनाक्रम पर टिकी हैं कि कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन शांतिपूर्ण तरीके से होता है या राज्य की राजनीति में नया सियासी भूचाल देखने को मिलता है।

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