लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
मेयर से ज्यादा डिप्टी मेयर की कुर्सी पर नजर
मतदान खत्म होते ही शुरू हुई अंदरूनी लामबंदी, विधायकों के करीबी पार्षदों ने तेज की लॉबिंग; 14 सितंबर को आएंगे नतीजे
राजस्थान से वरिष्ठ संवाददाता : नितिन मेहरा
जोधपुर। जोधपुर नगर निगम के 100 वार्डों में मतदान प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब चुनावी राजनीति का फोकस ईवीएम से निकलकर निगम की सत्ता के समीकरणों पर आ गया है। 14 सितंबर को होने वाली मतगणना से पहले ही शहर के राजनीतिक गलियारों में मेयर और डिप्टी मेयर की कुर्सी को लेकर अंदरूनी जोड़-तोड़ और संभावित दावेदारों की लॉबिंग चर्चा में है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार मुकाबला केवल महापौर की कुर्सी तक सीमित नहीं रहने वाला। डिप्टी मेयर का पद भी सत्ता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रभावशाली नेताओं और स्थानीय विधायकों के करीबी माने जाने वाले पार्षद प्रत्याशियों की ओर से अपने पक्ष में समर्थन जुटाने की कोशिशें शुरू होने की चर्चाएं हैं।
मेयर के साथ डिप्टी मेयर पद भी बना अहम
जोधपुर नगर निगम में इस बार महापौर पद सामान्य होने के चलते कई दावेदारों की नजर इस पद पर है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिप्टी मेयर का पद भी निगम की कार्यप्रणाली और राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने से पहले ही संभावित दावेदार अपने राजनीतिक संपर्कों को सक्रिय करने में जुटे हैं। हालांकि, किसके पास कितनी ताकत होगी और कौन वास्तविक दावेदार बनेगा, इसका फैसला 14 सितंबर के नतीजों के बाद ही साफ होगा।
अपने ही खेमे में चुनौती, अंदरखाने बैठकों की चर्चा
चुनाव के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में अब सबसे बड़ी चुनौती अपने ही दल के भीतर संभावित दावेदारों के बीच मानी जा रही है। पार्टी के भीतर मजबूत पकड़ रखने वाले पार्षद अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए वरिष्ठ नेताओं और प्रभावशाली राजनीतिक चेहरों से संपर्क साध रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कुछ संभावित दावेदारों ने अपने समर्थक पार्षदों को एकजुट करने के लिए अनौपचारिक बैठकों और संपर्कों का दौर शुरू कर दिया है। हालांकि, इन बैठकों और दावेदारियों को लेकर अभी किसी राजनीतिक दल की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं हुई है।
निर्दलीय और बागी पार्षद बन सकते हैं एक्स-फैक्टर
जोधपुर निगम चुनाव में निर्दलीय और प्रमुख दलों से अलग होकर चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों की भूमिका भी परिणाम के बाद महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो निर्दलीय और बागी पार्षद सत्ता के गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
ऐसे में मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के दौरान इन पार्षदों का समर्थन हासिल करना राजनीतिक दलों और संभावित दावेदारों के लिए अहम हो सकता है।
जयपुर से दिल्ली तक पैरवी की चर्चा
निगम की सत्ता में अहम पद हासिल करने की कोशिशों के बीच स्थानीय स्तर से लेकर जयपुर और दिल्ली तक राजनीतिक संपर्कों के सक्रिय होने की चर्चाएं भी तेज हैं।
संभावित दावेदार अपने राजनीतिक आकाओं और संगठन के वरिष्ठ नेताओं के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय निर्वाचित पार्षदों की संख्या, दलों के भीतर सहमति और चुनावी समीकरणों पर निर्भर करेगा।
14 सितंबर को खुलेगा पहला पत्ता
फिलहाल ईवीएम में बंद जनादेश का इंतजार है। 14 सितंबर को पार्षदों के परिणाम घोषित होने के बाद ही यह तस्वीर साफ होगी कि निगम में किस दल की स्थिति मजबूत है और कौन-कौन से पार्षद सत्ता के समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इसके बाद महापौर और उपमहापौर के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में अगले कुछ दिन जोधपुर नगर निगम की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
ईवीएम में जनता का फैसला बंद है, लेकिन निगम की अगली सत्ता के लिए राजनीतिक फील्डिंग शुरू हो चुकी है। अब नजर 14 सितंबर के नतीजों पर है—कौन बनेगा किंगमेकर और किसके सिर सजेगी निगम की सत्ता, इसका जवाब आने वाले दिनों में मिलेगा।

















































