लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान और ग्रामीण विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने के प्रयासों का मिला सम्मान
झालावाड़। महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय पचपहाड़ के जीव विज्ञान शिक्षक डॉ. दिव्येंदू सैन का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन होना झालावाड़, भवानीमंडी और पचपहाड़ क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। शिक्षक दिवस के अवसर पर डॉ. सैन को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी जा रही हैं।
5 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक दिवस समारोह में देशभर से चयनित 48 शिक्षकों को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया जाएगा। राजस्थान से इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए केवल दो शिक्षकों का चयन हुआ है, जिनमें झालावाड़ के डॉ. दिव्येंदू सैन भी शामिल हैं।
लंबे समय बाद झालावाड़ के शिक्षक को राष्ट्रीय सम्मान
डॉ. सैन का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन झालावाड़ जिले के लिए विशेष उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे अंतराल के बाद जिले के किसी शिक्षक को राष्ट्रीय स्तर पर यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलने जा रहा है।
डॉ. सैन ने सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यार्थियों को विषय की गहराई तक पहुंचाने के लिए लगातार नवाचार किए हैं। विशेष रूप से खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उनके कार्य और उपलब्धियां उल्लेखनीय रही हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें अवसर देने और उनकी क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रयास किए हैं।
पहले भी मिल चुके हैं कई प्रतिष्ठित सम्मान
डॉ. दिव्येंदू सैन को इससे पहले भी राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार, रिलायंस फाउंडेशन टीचर्स अवार्ड, हाड़ौती गौरव सम्मान और झालावाड़ गौरव सम्मान सहित कई सम्मान मिल चुके हैं। इसी वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर भी उन्हें जिला स्तर पर जिला कलेक्टर द्वारा सम्मानित किया गया था।
डॉ. सैन को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं नासा और गूगल की ओर से भी प्रमाणित किए जाने का उल्लेख किया गया है। उनके द्वारा खोजे गए क्षुद्र ग्रह (Asteroid) को नासा द्वारा नामांकन दिया जाना भी उनके वैज्ञानिक योगदान की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जाता है।
वनस्पति विज्ञान में शोध और पीएचडी की उपाधि
डॉ. सैन ने वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में “Studies on Flora of Gagron Forts and its Environment with Special Reference to Eco Tourism” विषय पर शोध प्रस्तुत किया, जिसके लिए उन्हें पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया।
शिक्षण के साथ-साथ विज्ञान, पर्यावरण और विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में उनके प्रयास लगातार जारी रहे हैं।
सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय भागीदारी
डॉ. सैन ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में भी सहयोग किया है। नेत्रदान कार्यक्रम के लिए उनके संकल्प और समर्थन को भी महत्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा जा रहा है। शिक्षित और बुद्धिजीवी व्यक्तित्वों की ओर से सामाजिक अभियानों को मिलने वाला सहयोग अन्य लोगों को भी ऐसे कार्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए डॉ. दिव्येंदू सैन के चयन पर क्षेत्रवासियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों में खुशी का माहौल है। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान की पहचान है, बल्कि झालावाड़ जिले और राजस्थान के लिए भी गौरव का विषय है।



















































