लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
डिप्टी मेयर पर राजपूत समीकरण की चर्चा
जयपुर। जयपुर नगर निगम के नए महापौर को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रहा मंथन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। सुनील कोठारी का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में बना हुआ है। पार्टी सूत्रों और पिछले दिनों की राजनीतिक गतिविधियों के बीच संकेत हैं कि कोठारी के नाम पर नेतृत्व गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि, नामांकन की अंतिम प्रक्रिया तक आधिकारिक घोषणा का इंतजार बना हुआ है।
सुनील कोठारी वार्ड 112 से चुनाव जीतकर पार्षद बने हैं। वे लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं और प्रदेश उपाध्यक्ष तथा जयपुर शहर भाजपा अध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं। कोठारी जेम्स एंड ज्वेलरी कारोबार से जुड़े प्रमुख कारोबारी हैं और जयपुर के व्यापारिक वर्ग में उनकी पहचान है।
कोठारी के नाम के पीछे संगठन और सामाजिक समीकरण
मेयर पद के लिए सुनील कोठारी के अलावा पुनीत कर्णावत, शैलेंद्र भार्गव, विमल अग्रवाल और भवानी सिंह राजावत जैसे नाम भी चर्चा में रहे हैं। इससे पहले सुभाष सिंघी का नाम भी संभावित दावेदारों में सामने आया था।
कोठारी के पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण बात उनका लंबा संगठनात्मक अनुभव माना जा रहा है। भाजपा की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण पार्टी के विभिन्न स्तरों पर उनकी पहचान है। दूसरी ओर उनका व्यापारी वर्ग से जुड़ाव भी जयपुर जैसे बड़े कारोबारी शहर के राजनीतिक समीकरणों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जैन समाज से आने वाले कोठारी के नाम के साथ सामाजिक प्रतिनिधित्व का पहलू भी जुड़ता है। हालांकि इसी समाज से पुनीत कर्णावत भी आते हैं और वे पहले जयपुर ग्रेटर के उपमहापौर रह चुके हैं। इसलिए मेयर पद को लेकर दोनों नामों की चर्चा स्वाभाविक रूप से राजनीतिक हलकों में रही है।
क्यों बदला मेयर की दौड़ का समीकरण?
भाजपा ने नगर निगम चुनाव में 150 में से 78 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया है। कांग्रेस को 53 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। ऐसे में मेयर का चुनाव भाजपा के लिए बहुमत के बावजूद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पार्टी को अपने पार्षदों को एकजुट रखना होगा।
यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व मेयर के साथ-साथ डिप्टी मेयर के सामाजिक और राजनीतिक समीकरण पर भी नजर रख रहा है।
डिप्टी मेयर में राजपूत चेहरे की चर्चा
भाजपा के भीतर अब चर्चा इस बात की भी है कि यदि मेयर पद पर जैन समाज से सुनील कोठारी को आगे किया जाता है तो डिप्टी मेयर पद के लिए राजपूत समाज को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। इसे जयपुर भाजपा के भीतर अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
राजपूत समाज के एक हिस्से में भाजपा के प्रति हाल के राजनीतिक असंतोष की चर्चाओं के बीच यह समीकरण पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि डिप्टी मेयर के नाम पर भी अभी अंतिम आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
ब्राह्मण समाज की दावेदारी भी चर्चा में रही है, लेकिन जयपुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व ब्राह्मण सांसद के पास होने के कारण पार्टी के भीतर सामाजिक संतुलन को लेकर अलग-अलग समीकरणों पर विचार किए जाने की चर्चा है।
कांग्रेस के सामने भी बड़ी चुनौती
दूसरी ओर कांग्रेस भी मेयर चुनाव को महज औपचारिकता मानकर नहीं चल रही है। कांग्रेस पार्टी की ओर से पूर्व नेता प्रतिपक्ष धर्म सिंह सिंघानिया का नाम महापौर पद के लिए तय हो गया है . पार्टी की ओर से संभावित नामों को लेकर सुनीता मावर और भरत मेघवाल के नाम राजनीतिक चर्चाओं में बताए जा रहे हैं, हालांकि इन नामों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। धर्म सिंह सिंघानिया को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है.
भाजपा के पास संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस की रणनीति भाजपा के भीतर किसी भी संभावित असंतोष, क्रॉस-वोटिंग या अंदरूनी मतभेद को राजनीतिक अवसर में बदलने की हो सकती है। भाजपा के भीतर भी क्रॉस-वोटिंग की आशंका के कारण अंतिम समय तक सतर्कता बरती जा रही है।
अब निगाह आधिकारिक घोषणा पर
जयपुर मेयर चुनाव में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा नेतृत्व अंतिम मुहर किस नाम पर लगाता है। सुनील कोठारी का नाम लगातार प्रमुखता से सामने आ रहा है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी की आधिकारिक घोषणा और नामांकन प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगा।
इसके बाद असली मुकाबला केवल मेयर की कुर्सी का नहीं होगा, बल्कि मेयर-डिप्टी मेयर की जोड़ी के जरिए जयपुर में संगठन, सामाजिक संतुलन और राजनीतिक संदेश—तीनों को साधने का होगा।
