हनुमान बेनीवाल से डरी सरकार, पीएसओ हटाने होंगे कमजोर या बढ़ेगा समर्थन!

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जयपुर। राजस्थान सरकार के गृह विभाग ने एक आदेश जारी कर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा में तैनात जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के 3 पीएसओ को हटा दिया है। इसके साथ ही हनुमान बेनीवाल समर्थकों ने सरकार पर दावा बोल दिया बस इतनी ही हिम्मत कभी आलोचना का सामना भी करना सीखो एक सांसद से घबरा गए।  उनकी सुरक्षा घटाने से हनुमान बेनीवाल का जनता के बीच बना कद नहीं घटा सकेगो।  हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा में हमेशा हजारों अपनी जान देने को तैनात रहते हैं।  सरकार उनको कैसे हटाएगी ये बताए ?

बेनीवाल बोले मैंने सुरक्षा नहीं मांगी, सरकार पहले क्यों दी अब हटाई क्यों उनसे पूछो?

आरएलपी सुप्रीमों हनुमान बेनिवाल अपनी बेबाकी और विवादित बयानों को लेकर हमेशा विवादों और चर्चा में रहते हैं। वे लगातार सरकार और विरधी पार्टियों के नेताओं के खिलाफ भी बयानबाजी कर विवादों में रहते हैं । कभी खनन माफिया, तो कभी टोल माफिया के खिलाफ और सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर भी वे विरोधियों के निशाने पर रहे। कई बार माफिया ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी ।  सब इंस्पेक्टर भर्ती के दौरान विरोधियों के निशाने पर रहे हनुमान बेनीवाल को इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन इंटेलिजेंस ऑफिसर संजय अग्रवाल ने उन्हें जयपुर पुलिस कमिश्नररेट से 3 पीएसओ Ak47 सहित कंमाडों उपलब्ध कराए थे नागौरा में भी एसे ही कमांडों उपल्बध कराए थे। बेनीवाल का कहना है कि मैने कभी भी सुरक्षा नहीं मांगे।

समर्थक बोले हम सब सुरक्षा में तैनात

बेनीवाल बोले सरकार ने मेरे एक बयान के बाद मेरी सुरक्षा में तैनात पीएसओ को हटाकर अपनी औछी मानसिकता का परिचय दिया है।  लेकिन इससे मेरी लोकप्रियता में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। भजनलाल सरकार मेरी सुरक्षा क्या करेगी? मेरी सुरक्षा के लिए प्रदेशभर के हजारों युवा हमेशा साथ खड़े हैं। बेनीवाल ने कहा- मुझे सुरक्षा क्यों दी गई और अब क्यों हटाई गई, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।मेरी सुरक्षा के लिए प्रदेश के हजारों युवा हमेशा साथ खड़े हैं।बेनीवाल ने कहा- मैंने कई ताकतवर लोगों के खिलाफ लड़ाई लड़ी है, जिनमें बजरी माफिया और पेपर लीक गैंग शामिल है। और इनके खिलाफ आगे भी लड़ाई जारी रहेगी।

बेनीवाल सरकार के इस कदम से होंगे मजबूत , कुछ हुआ तो देना पड़ेगा जवाब

इस कदम को राजनीतिक हलकों में हाल ही में सरकार के खिलाफ दिए गए उनके बयानों और आक्रामक प्रदर्शनों से जोड़कर देखा जा रहा है।जनता के बीच हनुमान बेनीवाल की पहचान एक जमीन से जुड़े नेता की है। उनकी पार्टी (रालोपा) सीधे आमजन, विशेष रूप से मारवाड़ क्षेत्र में, एक मजबूत जनाधार रखती है। ऐसे में सुरक्षा घटने से उनकी जन-स्वीकार्यता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

बेनीवाल पर आंच आई तो सरकार की जवाबदेही होगी

बेनीवाल समर्थकों का कहना है कि जिस तरह से बेनीवाल माफियाओं के खिलाफ सड़क पर संघर्ष करते रहते है उससे  कई माफिया उन्हें आए दिन धमकियां देते रहते है। जिसके चलते यदि उन पर कभी धोखे से भी हमला हो गया तो उसका जिम्मेदार कौन होगा  जाहिर सी बात है कि

सुरक्षा पर सवाल: कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में इस तरह की कटौती उनकी राजनीतिक और सामाजिक सक्रियता को प्रभावित करने के बजाय उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को जरूर जोखिम में डाल सकती है। सरकार के इस एक्शन से बेनीवाल को उनके समर्थकों का साथ और ताकत से मिलेगा और वे आने वाले दिनों में बेनीवाल और ताकतवर बनकर उभरेंगे।

 

 

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