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हनुमान बेनीवाल ने सीएम भजनलाल शर्मा को कहा ‘महामूर्खाधिराज

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

भैराना धाम बिचून में फूटा जन-आक्रोश: महाआंदोलन में उमड़ा हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब, टेंट पड़े छोटे

​बीजेपी-कांग्रेस दोनों को घेरा

​​बिचून/जयपुर। भैराना धाम बिचून की पवित्रता और आस्था को बचाने के लिए चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आज एक ऐतिहासिक और उग्र ‘महाआंदोलन’ में तब्दील हो गया। धाम के प्रांगण में आयोजित इस महाआंदोलन में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि व्यवस्था के लिए लगाए गए विशाल टेंट भी छोटे पड़ गए। हजारों की संख्या में पहुँचे श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं के गगनभेदी नारों से पूरा बिचून क्षेत्र गूंज उठा।

​इस महाआंदोलन में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। मंच पर देश और प्रदेश के विभिन्न अखाड़ों, पीठों और संप्रदायों के प्रतिष्ठित साधु-संत उपस्थित रहे, जिन्होंने एक सुर में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।

​जनसमूह के भारी जोश और नारों के बीच हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘महामूर्खाधिराज’ की संज्ञा दी। बेनीवाल ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों बड़ी पार्टियों को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा:

​”यह सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है। साधु-संतों को दुःखी किया जा रहा है और हमारी सदियों पुरानी धरोहर ‘दादू तपोवन’ को नष्ट करने की साजिश रची जा रही है। बीजेपी हो या कांग्रेस, दोनों ने ही आज तक भैराना धाम की आस्था के पक्ष में कोई निर्णय नहीं किया। दोनों ने इस पवित्र भूमि के साथ केवल छल किया है।”

अंतिम सांस तक लड़ेंगे, तपोवन को मूल अवस्था में करेंगे विकसित: बेनीवाल

​रालोपा सुप्रीमो ने संतों के चरणों में शीश नवाकर मंच से घोषणा की कि आरएलपी इस लड़ाई में साधु-संतों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा, “हम अपनी अंतिम सांस तक भैराना धाम की आस्था और तपोवन को बचाने के लिए संघर्ष करेंगे। इस पवित्र धाम को नष्ट नहीं होने दिया जाएगा, बल्कि इसे पुनः इसकी मूल और भव्य अवस्था में विकसित करके ही हम दम लेंगे।”

विभिन्न अखाड़ों के संतों ने दिया आशीर्वाद, कार्यकर्ताओं में दिखा भारी जोश

​महाआंदोलन के दौरान मंच से विभिन्न संप्रदायों के पूज्य संतों ने अपने ओजस्वी विचार व्यक्त किए। संतों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति और संतों के सब्र का इम्तिहान न लिया जाए। आंदोलन में मौजूद युवाओं और कार्यकर्ताओं का जोश सातवें आसमान पर था, जो भारी गर्मी के बावजूद टेंट छोटे पड़ने पर भी खुले आसमान के नीचे डटे रहे।

सहमति नहीं बनी: अब होगा सीधे ‘जयपुर कूच’

​महाआंदोलन के दौरान प्रशासन के साथ वार्ता बेनतीजा रही और धाम की रक्षा को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई। सरकार के इस अड़ियल रुख को देखते हुए महाआंदोलन की संघर्ष समिति, संतों और हनुमान बेनीवाल ने सर्वसम्मति से अंतिम और सबसे बड़ा निर्णय लिया है।

​बड़ा फैसला: यदि सरकार ने तुरंत प्रभाव से मांगें नहीं मानीं, तो जल्द ही हजारों श्रद्धालुओं और संतों के साथ ‘जयपुर कूच’ किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

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