डीजल बिक्री को लेकर नए नियमों के दावों पर चर्चा

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली | नितिन मेहरा

देश में डीजल की थोक और खुदरा बिक्री को लेकर नए प्रतिबंधों संबंधी दावे सामने आने के बाद औद्योगिक एवं परिवहन क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विभिन्न माध्यमों में यह दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने रिटेल पेट्रोल पंपों से थोक मात्रा में डीजल खरीद पर रोक लगाने तथा प्रतिदिन 200 लीटर की सीमा निर्धारित करने का निर्णय लिया है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना या विस्तृत आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हुआ है।

दावों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य डीजल की जमाखोरी, कालाबाजारी और तेल कंपनियों को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान को रोकना बताया जा रहा है। साथ ही बड़े औद्योगिक एवं व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अधिकृत बल्क सेल पॉइंट्स से ईंधन खरीदने की व्यवस्था से जोड़ने की बात भी कही जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, यदि ऐसे प्रावधान लागू होते हैं तो बड़े मॉल, अस्पताल, निर्माण परियोजनाएं, निजी बस ऑपरेटर और अन्य बड़े उपभोक्ता सीधे रिटेल पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल नहीं खरीद सकेंगे। वहीं आम वाहन चालकों और छोटे व्यावसायिक वाहनों पर इसका सीमित प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि किसी भी नए नियामकीय निर्णय का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए निर्बाध ईंधन उपलब्धता सुनिश्चित करना, आपूर्ति श्रृंखला को संतुलित रखना तथा अनियमित खरीद-बिक्री पर नियंत्रण करना हो सकता है।

फिलहाल संबंधित दावों को लेकर सरकार, तेल विपणन कंपनियों अथवा पेट्रोलियम मंत्रालय की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही नए नियमों की वास्तविक स्थिति और प्रभाव स्पष्ट हो सकेगा।

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