लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
रिपोर्टर: दुर्योधन मयंक, उनियारा
उनियारा। श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सुथड़ा में देवाधिदेव भगवान धर्मनाथ का गर्भ कल्याणक महामहोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया।
प्रबंध समिति के अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराणा एवं सन्तु जैन ने बताया कि भगवान धर्मनाथ जैन धर्म के 15वें तीर्थंकर हैं, जिनका जन्म रत्नपुरी (उत्तर प्रदेश) में राजा भानु और माता सुव्रता देवी के यहाँ इक्ष्वाकु वंश में माघ शुक्ल तृतीया को हुआ था। मान्यता है कि उनके गर्भ में आने से पूर्व छह माह तक रत्नों की वर्षा हुई, जिससे नगर का नाम रत्नपुरी पड़ा। उनका चिन्ह वज्र है।
भगवान धर्मनाथ ने दीर्घकाल तक राज्य करने के पश्चात वैराग्य धारण कर दीक्षा ली, दधिपर्ण वृक्ष के नीचे कैवल्य ज्ञान प्राप्त किया तथा सम्मेद शिखर पर निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त किया। उन्होंने राग-द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों का त्याग कर आत्मशुद्धि और नैतिक जीवन अपनाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर शास्त्री प्रिंस जैन देवांश के निर्देशन में मंगलाष्टक के साथ नित्य अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन हुआ। वार्षिक शांतिधारा रमेशचंद, रौनक सर्राफ (जयपुर) तथा पांडुशिला पर शांतिधारा रमेशचंद एवं नरेंद्र कुमार बनेठा द्वारा की गई। इसके पश्चात देव-शास्त्र पूजा, चौबीस भगवान की मूलनायक पूजा एवं भगवान धर्मनाथ की विशेष पूजा कर गर्भ कल्याणक महामहोत्सव मनाया गया।
भक्तामर संयोजक मनोज जैन एवं चेतन जैन ने बताया कि सायं 7:00 बजे भक्तामर अनुष्ठान मंडल बनेठा द्वारा भक्तामर दीपार्चना का आयोजन भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।