“देश को बचाना है तो पंडित नेहरू की विदेश नीति अपनानी होगी”- गहलोत

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

जयपुर। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने जयपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज हमें  पंडित जवाहरलाल नेहरू  की विदेश नीति अपनानी की जरुरत है।  गहलोत ने  कहा कि  नेहरु जी ने जो   जो आधारभूत ढांचा तैयार किया देश में, उसी पे आज देश टिका हुआ है। उस ज़माने में आज़ादी मिलते ही, बड़े-बड़े बांध बनाए हों, इस्पात के कारखाने बनाए हों, एम्स बनाए हों, आईआईटी बनाई हों, शिक्षा में, स्वास्थ्य में, उद्योग-धंधों के अंदर, किसानों के लिए बांध का निर्माण, बिजली का उत्पादन उनकी एक लंबी कहानी है।

देश में पंडित नेहरू के बाद में 14 प्रधानमंत्री हुए हैं। शपथ तो 15 लोगों ने ली क्योंकि गुलजारीलाल नंदा साहब दो बार लिए, वरना 14 प्रधानमंत्री रहे हैं देश के अंदर।

पर नेहरू जी की विदेश नीति थी, उसको किसी ने भी डिस्टर्ब नहीं किया। चाहे वो पंडित नेहरू के विचारों से मिलते या नहीं मिलते हों, मुझे याद है एक बार वाजपेयी जी विदेश मंत्री बने थे, मोरारजी देसाई के वक्त में। तब भी उन्होंने कहा कि विदेश नीति पंडित नेहरू की ही चलेगी देश के अंदर। वो ज़माना हमने देखा है।

आज क्या देखते हैं? हमारी विदेश नीति की जो हालत हुई है, उसके कारण से पूरा देश चिंतित है। विदेश नीति ऐसी हो गई है कि कोई मुल्क आपके साथ ही खड़ा नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, दुनिया का एक मुल्क आपके साथ आके खड़ा नहीं हुआ, कमाल कर दिया। पाकिस्तान के साथ में चाइना भी था, टर्की भी था। पर रशिया के साथ भी अब पहली वाली बात नहीं रही। किसी ज़माने में दोस्त हमारा रशिया हुआ करता था। इंदिरा जी के वक्त में ये सातवां बेड़ा जो है अमेरिका का, जो अब ईरान में जा रहा है, उससे बड़ा बेड़ा भेज दिया इंडिया के खिलाफ में जब युद्ध चल रहा था बांग्लादेश की आज़ादी का। इंदिरा गांधी ने अमेरिका की परवाह नहीं करी। आज अमेरिका कहता है कि आप तेल रशिया से नहीं खरीदो।

आपकी ट्रेड डील कितनी परसेंट होगी टैक्स की? 50, कभी 25 एक मज़ाक बना रखा है ट्रंप ने हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी का भी। कभी कहते हैं कि वो दोस्त हैं मेरे, कभी कहते हैं मैं उनका पॉलिटिकल कैरियर खत्म कर सकता हूँ, कभी इंडिया के बारे में वो बहुत ही निम्न बातें करते हैं, हमारे देश के बारे में, और हम चुप हैं। ये हमारी विदेश नीति के हालात हैं।

अब भी मोदी जी को चाहिए कि गलती स्वीकार करके पुनः जो पंडित नेहरू की विदेश नीति थी, उसपे वापस देश को लाना चाहिए, अगर देश को बचाना है तो।

हालात बहुत गंभीर हैं। डेमोक्रेसी भी खतरे में आ गई है। इनकी जो अप्रोच है, बहुत भयानक है। धर्म के नाम पे देशवासियों को भड़का रहे हैं, गुमराह कर रहे हैं, वोट ले रहे हैं, पर देश हित में कुछ भी नहीं है। हालात बहुत गंभीर होते जा रहे हैं, इसपे हमें विचार करना चाहिए।

विदेश नीति के बारे में तो मैं बार-बार कहना चाहूंगा। देश की आर्थिक नीति भी, सामाजिक नीति भी, राजनीतिक स्थिति भी तमाम डिपेंड करती हैं कि आपकी विदेश नीति क्या है। क्योंकि दुनिया ग्लोबल वर्ल्ड हो गया है, इंटरनेट की सेवाएं हैं, पूरी दुनिया से हम जुड़ चुके हैं। पहले वाली बात नहीं रही कि अमेरिका में क्या हो रहा है तो हमें मालूम नहीं पड़ता था। अब तो हर चीज़ का दुनिया के सब मुल्कों के अंदर इंटरनेट के माध्यम से सब पहुँचता है कि कौन क्या मुल्क में क्या घटनाएँ, दुर्घटनाएँ हुई हैं।

इसलिए हमारी विदेश नीति का जो महत्व है, वो प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार को समझना चाहिए और विदेश नीति वापस जो पंडित नेहरू की है, उसपे लाना चाहिए। तब तो ये देश आगे बढ़ पाएगा, वरना ये विश्व गुरु बनने की बात, या देश को विश्व गुरु बनाने की बात ये सब खाली कागजों में धरी रह जाएगी। ये मेरा मानना है।

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