लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
पहली बार जिला प्रमुख की कुर्सी पर नजरें
सतवीर कसाना, महारानी दिव्या सिंह और प्रताप महरावर के नाम चर्चा में; गुर्जर-मेव समीकरण साधने की रणनीति की भी अटकलें
डीग | मुकेश सैनी
डीग जिले में निकाय चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच अब पंचायत चुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। जिले के गठन के बाद पहली बार जिला प्रमुख का पद अस्तित्व में आने जा रहा है। ऐसे में इस पद को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर संभावित दावेदारों और सामाजिक समीकरणों पर मंथन शुरू हो गया है।
जिला प्रमुख की कुर्सी पहली बार सामने होने के कारण इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में संभावित चेहरों को लेकर चर्चाओं का दौर चल रहा है। स्थानीय राजनीतिक हलकों में फिलहाल समाजसेवी एवं भाजपा नेता सतवीर कसाना, महारानी दिव्या सिंह और कांग्रेस नेता प्रताप महरावर के नाम प्रमुखता से चर्चा में बताए जा रहे हैं।
जिला प्रमुख पद के लिए कई नाम, किसके सिर सजेगा ताज?
डीग में पहली बार जिला प्रमुख का चुनाव होने के कारण यह पद राजनीतिक रूप से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पंचायत चुनाव में जिला परिषद सदस्यों के चुनाव परिणाम के बाद जिला प्रमुख का चुनाव होगा, ऐसे में अभी से संभावित दावेदार अपने-अपने स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक संपर्क मजबूत करने में जुटे बताए जा रहे हैं।
स्थानीय चर्चाओं में समाजसेवी एवं भाजपा नेता सतवीर कसाना का नाम जिला प्रमुख पद की दौड़ में प्रमुखता से लिया जा रहा है। उनके समर्थकों के बीच भी इस संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, अभी किसी राजनीतिक दल की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी नाम की घोषणा नहीं हुई है।
इसी तरह महारानी दिव्या सिंह का नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा में है। वहीं कांग्रेस खेमे से प्रताप महरावर के नाम को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा बनी हुई है।
गुर्जर-मेव समीकरण पर भी नजर
डीग की राजनीति में सामाजिक समीकरणों की भूमिका को देखते हुए जिला प्रमुख और उप जिला प्रमुख के पदों को लेकर अलग-अलग संभावनाएं जताई जा रही हैं। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार गुर्जर और मेव समाज के बीच संतुलन साधने की रणनीति भी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
सूत्रों के हवाले से ऐसी चर्चाएं हैं कि यदि राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो जिला प्रमुख पद पर किसी गुर्जर चेहरे और उप जिला प्रमुख पद पर मेव समाज से प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक एवं राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास किया जा सकता है।
हालांकि, यह फिलहाल राजनीतिक अटकलों और स्थानीय चर्चाओं तक ही सीमित है। वास्तविक स्थिति चुनाव परिणाम, आरक्षण व्यवस्था, पार्टी नेतृत्व के निर्णय और जिला परिषद में बनने वाले बहुमत के समीकरण के बाद ही स्पष्ट होगी।
पहली बार बनेगा जिला प्रमुख, इसलिए बढ़ी राजनीतिक दिलचस्पी
डीग जिले के गठन के बाद पहली बार जिला परिषद और जिला प्रमुख की चुनावी प्रक्रिया होने जा रही है। यही वजह है कि जिला प्रमुख का पद स्थानीय राजनीति में विशेष महत्व रखता है। इस पद के जरिए जिले के ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जुड़े राजनीतिक समीकरणों में प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
ऐसे में भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले नेताओं की गतिविधियों पर भी राजनीतिक जानकारों की नजर बनी हुई है। संभावित उम्मीदवारों के सामाजिक आधार, क्षेत्रीय पकड़ और पार्टी संगठन में प्रभाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
चुनावी गणित बताएगा किसके पक्ष में जाएगा समीकरण
फिलहाल जिला प्रमुख पद के लिए किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ संभावित दावेदारों की तस्वीर भी स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सबसे बड़ा सवाल यह रहेगा कि पंचायत चुनाव के बाद जिला परिषद में किस दल को बहुमत मिलता है और कौन-कौन से सामाजिक समीकरण जिला प्रमुख के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यदि किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय और अन्य सदस्यों की भूमिका भी अहम हो सकती है।
डीग में पहली बार जिला प्रमुख की कुर्सी के लिए शुरू हुई यह सियासी कवायद आने वाले दिनों में और तेज होने के आसार हैं। फिलहाल सतवीर कसाना, महारानी दिव्या सिंह और प्रताप महरावर जैसे नामों की चर्चा ने डीग की ग्रामीण राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनावी मैदान सजने के बाद इनमें से कौन दावेदारी को मजबूती से आगे बढ़ाता है और किसके पक्ष में राजनीतिक समीकरण आकार लेते हैं।




















































