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अपेक्स विश्वविद्यालय, में ‘कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन’ (CPR) पर सेमिनार

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
जयपुर| अपेक्स विश्वविद्यालय, जयपुर में “कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR)” विषय पर एक दिवसीय शैक्षणिक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नर्सिंग विद्यार्थियों को हृदयगति रुकने की स्थिति में रोगी को पुनर्जीवन प्रदान करने की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों से प्रशिक्षित करना था। सेमिनार का आरम्भ अपेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग के कक्षा प्रतिनिधियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और नर्सिंग की जन्मदाता फ्लोरेंस नाइटिंगल के फोटो पर माल्यार्पण के साथ हुआ।
विश्वविद्यालय के परिसर निदेशक एयर कोमोडोर देवेन्द्र सिंह शेखावत ने नर्सिंग प्रॉफ़ेशन के महत्त्व एवं वर्तमान के रोगों में उसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
प्रो.(डॉ.) शेर सिंह मोरोड़िया, डीन, नर्सिंग संकाय ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज की चिकित्सा व्यवस्था में कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) एक ऐसा जीवन-रक्षक कौशल है, जिसका ज्ञान हर नर्सिंग छात्र/छात्रा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि समय पर और सही तरीके से किया गया कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) किसी भी आपातकालीन स्थिति में रोगी की जान बचा सकता है।
सेमिनार मे व्यस्कों पर दीपक कुमार ने एवं शिशुओं पर मोनिका कुमारी ने कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) के सिद्धांतों, चरणों और व्यावहारिक प्रक्रियाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने हृदयगति रुकने के कारणों, प्रारंभिक संकेतों की पहचान, और ‘गोल्डन मिनट्स’ के महत्त्व के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने छात्रों को 30:2 एवं 15:2 कंप्रेशन–वेंटिलेशन तकनीक, हैंड्स-ओनली CPR, एयरवे मैनेजमेंट, और रेस्क्यू ब्रीदिंग के वैज्ञानिक तरीकों का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही, मैनिकिन मॉडल पर लाइव डेमो देकर सही गति, गहराई और दबाव की पद्धति समझाई।
नर्सिंग विद्यार्धियों ने भी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) से जुड़े विषयों एवं
परिस्थितियों पर अपने विचार प्रकट किए तथा डेमोस्ट्रेशन दिये।
कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों को छोटे-छोटे समूहों में बाँटकर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने प्रत्येक छात्र की तकनीक को सुधारते हुए उन्हें वास्तविक आपातकालीन परिस्थिति में त्वरित एवं आत्मविश्वासपूर्ण प्रतिक्रिया देने के लिए सक्षम बनाया।
इसके बाद एक प्रश्नोत्तरी सत्र आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों से कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) से संबंधित तकनीकी, नैतिक और व्यावहारिक प्रश्न पूछे।
सेमिनार के अंत में विद्यार्थियों से प्रतिपुष्टि (Feedback) फॉर्म भरवाये गये जिसमें उन्होनें इस अभ्यास को अत्यंत उपयोगी बताया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम उनके व्यावहारिक ज्ञान को गहरा करते हैं।
इस कार्यक्रम को उपयोगी बनाने के लिए नर्सिंग शिक्षक अशोक वर्मा, रोनित राज, हेमन्त कुमार, दीपक कुमार, मोनिका कुमारी ने अथक प्रयास किया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कार्यक्रम की संयोजिका मोनिका बारी ने सभी अतिथियों, और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि छात्र बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए निरंतर तैयार रहें।

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