आवारा कुत्तों के हमले में घायल मासूम की मौत

0
148
- Advertisement -

लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

 अंतिम संस्कार के बाद परिजनों को थाने बुलाया गया
स्थानीय संवाददाता – ओमप्रकाश चौधरी

पीसांगन (अजमेर)। आवारा कुत्तों के हमले में गंभीर रूप से घायल डेढ़ माह के मासूम ‘सांवरा’ की जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। मासूम ने चार दिनों तक वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ने के बाद दम तोड़ दिया।

झोपड़ी में घुसकर किया हमला

घटना 24 अप्रैल की रात पीसांगन उपखंड क्षेत्र के सरसड़ी गांव से लगती नागेलाव सरहद की है। मासूम झोपड़ी में सो रहा था, जबकि उसकी मां केलम बाहर चूल्हे पर खाना बना रही थी। इसी दौरान आवारा कुत्तों का झुंड झोपड़ी में घुस गया और बच्चे पर हमला कर दिया।

बच्चे के रोने की आवाज सुनकर मां दौड़ी और कुत्तों से भिड़ गई। करीब 5 मिनट तक संघर्ष करते हुए उसने अपने बेटे को बचाया। इस दौरान बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया, उसकी आंतें तक बाहर आ गईं।

चार दिन चला इलाज

घायल बच्चे को तुरंत अजमेर के जेएलएन अस्पताल लाया गया, जहां सर्जरी के बाद उसे आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया। हालत नाजुक होने के चलते आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।

⚠️ अंतिम संस्कार के बाद उठे सवाल

अस्पताल प्रशासन ने सुबह 7:20 बजे शव सुपुर्दगी नामा देकर परिजनों को शव सौंप दिया। परिजन शव को लेकर पुष्कर क्षेत्र में सावित्री माता पहाड़ी की तलहटी स्थित श्मशान में अंतिम संस्कार कर आए।

लेकिन इसके बाद मामला उलझ गया। अस्पताल प्रशासन ने पोस्टमार्टम का हवाला देते हुए परिजनों से शव वापस लाने के लिए संपर्क किया। इस दौरान पीड़ित पिता मकराम भोपा को अलग-अलग नंबरों से तीन बार कॉल किए गए।

बाद में अस्पताल ने पीसांगन पुलिस थाना से संपर्क कर परिजनों को थाने बुलवाया। अंतिम संस्कार के बाद परिजनों को थाने के चक्कर लगाने पड़े, जिससे वे आहत नजर आए।

️ परिजनों का दर्द

पीड़ित पिता मकराम भोपा ने कहा, “अगर पहले पोस्टमार्टम की बात कही होती तो हम जरूर करवाते। लेकिन अंतिम संस्कार के बाद ऐसा कहना हमारे साथ मजाक जैसा है।”

❓ कई सवाल अनुत्तरित

इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मासूम की मौत रेबीज संक्रमण से हुई या किसी अन्य कारण से।

️ गरीबी में जी रहा परिवार

पीड़ित परिवार बेहद गरीब है और फूस की झोपड़ी में रहता है। मकराम भोपा के पास आधार कार्ड के अलावा कोई सरकारी दस्तावेज नहीं है। परिवार को न तो सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है और न ही आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं।

यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद परिवारों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

- Advertisement -
Previous articleरणथंभौर में बाघ T-2402 की मौत, मॉनिटरिंग पर उठे सवाल
loktodaynews
लोक टूडे न्यूज " जनता की आवाज " देश की खबरों का एक मात्र वेब पोर्टल है। इस न्यूज पोर्टल के माध्यम से लोगों की आवाज को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाना ही प्रमुख लक्ष्य है। खबरें निष्पक्ष और बगैर किसी पूर्वाग्रह के प्रकाशित की जाएगी। लोक टुडे के नाम से दैनिक और पाक्षिक समाचार पत्र भी है। यू ट्यूब चैनल भी चलाया जा रहा है। आपका सहयोग अपेक्षित है। आप भी खबर , फोटो यहां भेज सकते हैं। आप वैबसाइट और पेपर से जुड़ने के लिए इस नंबर पर संपर्क कर सकते है। 9829708129, 8209477614,neerajmehra445@gmail.com, loktodaynews@gmail.com प्रधान संपादक नीरज मेहरा जयपुर।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here