दलित युवती से रेप और हत्या का आरोपी गोलू मीणा गिरफ्तार

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शादी से इनकार करने पर की गोली मारकर हत्या के लिए की हत्या

हत्या का शक नहीं हो इसलिए कुएं में फेंकी लाश

हत्या का सहयोगी पिता भी गिरफ्तार

कट्टे के दम पर किया मृतक आश्रित

एक तरफा प्रेम में शादी से इंकार करने पर रेप कर की हत्या

करौली । जिले के नादौती कस्बे में दलित युवती की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस ने हत्या के आरोपी स्थानीय युवक गोलू मीणा उर्फ प्रभाकर और उसके पिता को जयपुर से गिरफ्तार कर लिया है। करौली की पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता ने बताया कि आरोपी और मृतका के बीच प्रेम प्रसंग बताया जा रहा है । आरोपी , मृतका के साथ ही विवाह करना चाहता था और उसे अपने साथ भागने को मजबूर कर रहा था। युवती की सगाई हो चुकी थी और वह भागने और शादी करने से इंकार कर रही थी। इससे नाराज युवक ने उसे फोन कर बुलाया और कट्टे से डराया और रेपकर गोलीमार कर हत्या कर दी। इसीलिए उसने युवती की हत्या कर लाश को कुएं में फेंक दी जिससे लोगों को यह आत्महत्या लगे। लेकिन इस पूरे मामले में भाजपा सांसद डॉ किरोड़ ने मामला गैंगरेप और हत्या बताया । भाजपा ने इस मामले में करौली से लेकर जयपुर तक लगातार धरने प्रदर्शन किए । डीजीपी को ज्ञापन दिए ,नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा की बेल में खड़े होकर इस मामले को उठाया। पूरी बीजेपी इस मामले में आक्रामक नजर आई, जिसका नतीजा ये हुआ कि पुलिस को इस पूरे मामले का खुलासा करना पड़ा और जिसे कल तक आत्महत्या बता रही थी उसमें युवती के साथ रेप, हत्या का मामला निकला। आरोपी को और हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने में सहयोग करने के आरोपी युवक को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने आंदोलन समाप्त कर दिया है। वहीं प्रशासन ने मृतका के परिजनों को 500000 का चेक भेंट किया है। मृतका के परिजनों और पुलिस प्रशासन में सहमति के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। लेकिन पूरे मामले में यदि डॉक्टर किरोडी लाल मीणा पहल नहीं करते तो शायद युवती की मौत एक आत्माहत्या बनकर रह जाती और आरोपियों का कुछ भी नहीं बिगड़ता।

सनकी आशिक ने शादी से इंकार करने पर की हत्या

आपने जो उपर पढ़ी वो पुलिस की थ्योरी थी। लेकिन जिस अब बता रहे है। वो मामला कुछ अलग निकला बताया जा रहा है कि आरोपी युवक युवती के गांव का ही रहने वाला था। जो युवती से एक तरफा प्रेम करता था। युवती की सगाई हो चुकी थी। आरोपी युवक सगाई तोड़कर उसके साथ भागकर शादी करने का दबाव बना रहा था। 11 जुलाई को युवक ने युवती को फोन कर बुलाया। फिर से शादी करने और भागकर जाने की बात कही युवती के इंकार करने पर उसने बंदूक के कट्टे से डराया। फिर उसके साथ खुद के पुराने मकान में रेप किया। लड़की रेप की बात किसी को नहीं बता दे इसलिए उसकी गोलीमार कर हत्या कर दी। हत्या के बाद पूरा घटनाक्रम अपने पिता नहनाराम मीणा को बताया फिर पिता ने अपने बेटे को बचाने के लिए उसे लाश को बाइक पर रखकर गांव से करीब चार किलो मीटर दूर कुंए में फैंकने की सलाह दी। लाश कुंए में फैंकने तक युवक को किसी ने देखा नहीं । जब उन्हें लगा की ये बात किसी को पता नहीं लगेगी। तो आरोपी युवक गांव से फरार होकर जयपुर प्रताप नगर आ गया। वहीं पिता गांव की हर गति विधि पर नजर बनाए रख रहा था।

पिता- बेटे को भरोसा था इसे आत्महत्या मानकर शव का कर देंगे संस्कार

पिता -पुत्र को लग रहा था दलित समाज के लोग शादी की उम्र में बेटी के मरने को आत्महत्या ही मान लेंगे। पिता वैसे भी बाहर रहता है। इसलिए उन्हें लग रहा था कि मामला आत्महत्या में ही निपट जाएगा। हुआ भी ये ही जो दो दिन बाद मृतका का शव से बरामद हुआ उससे पहले मृतका के परिजन थाने मुकदमा दर्ज कराने गए तो थाने वालों ने मुकदमा दर्ज करने की बजाए उन्हे टरका दिया कि पढ़ी लिखी लड़की है एक दो दिन में आ जाएगी। रिपोर्ट लिखाने पर बदनामी होगी। लेकिन जिस दिन लड़की की लाश मिली डॅा. किरोड़ी लाल मीणा मौके पर पहुंच गए और फिर पुरे मामले में जयपुर से दिल्ली तक भाजपा ने सरकार को घेर लिया। पुलिस भी इस मामले में टालमटोल करने में जुटी थी । यहां तक की आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद भी मामला प्रेम प्रसंग का बता रही थी। लेकिन मामला निकला एक तरफा प्रेम का। ये तमाम बातें हत्या के आरोपी युवक ने खुद कबूल की है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बाबा नहीं आते तो न तो रेप का पता लगता और न ही गोली मारकर हत्या करने का । सबकुछ ऐसे ही दब जाता। यहां के विधायक पीआर मीणा तो कह ही रहे है मामला आपसी प्रेम का है । जाहिर सी बात है कि जब युवती ने शादी से इंकार किया। प्रेम से इंकार किया तो उसके साथ बंदूक के कट्टे के जोर पर पहले रेप फिर गोली मारकर हत्या और लाश को ठिकाने लगाने के लिए कुंए में फैंक कर फरार होना । सब कुछ एक स्क्रीप्ट की तरह हुआ है। लेकिन सरकार ने इतना सब कुछ होने के बावजूद अभी तक पीड़ित परिवार की मदद के लिए कोई हाथ नहीं बढ़ाया। जबकि सरकार अपने आपको दलित हितेषी बताती है।

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