
जिला स्तरीय जनसुनवाई की वीसी में कलेक्टर से ग्रामीणों ने लगाई गुहार
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कैरपुरा में रेल लाइन से दर्जनों मकानों एवं 40 ट्यूबवेल की कृषि भूमि नष्ट होने का खतरा
दांतारामगढ़ सीकर। (गिरधारी सोनी संवाददाता ) जिला स्तरीय जनसुनवाई के दौरान दांतारामगढ़ उपखंड मुख्यालय के आईटी केंद्र पर खाटूश्यामजी नगर पालिका के कैरपुरा गांव के ग्रामीणों ने पहुंच कर रींगस से खाटूश्यामजी तक प्रस्तावित 17 किलोमीटर की रेलवे लाइन का सर्वे दोबारा करवाने की मांग को लेकर वीडियो कांफ्रेंस के जरिए जिला कलेक्टर से ग्रामीणों ने गुहार लगाई । केंद्रीय रेल मंत्री के नाम एसडीएम गोविंद सिंह भींचर को ज्ञापन सौंपा। जिला कलेक्टर कमर उल जमाल चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से ज्ञापन देने आए ग्रामीणों से धैर्यता पूर्वक बातचीत की और उनकी समस्या को सुनकर कलेक्टर ने कहा कि रेलवे अधिकारियों एवं सर्वे टीम के इंजीनियरों से इस विषय में बातचीत की जाएगी । यथासंभव समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।

प्रस्तावित रेल लाइन से कई गांवों को खतरा
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को बताया कि खाटूश्यामजी के बीच 17 किलोमीटर रेलवे लाइन का सर्वे करने हेतु खसरे चिन्हित किए गए हैं। हमारे गांव कैरपुरा में जो खसरे चिन्हित किए गए हैं। वहां सघन आबादी है। कैरपुरा गांव में लगभग 2 किलोमीटर क्षेत्र में ही 25 घर सैकड़ो बीघा कृषि योग्य भूमि लगभग 40 ट्यूबवेल प्रस्तावित क्षेत्र में है, तथा उनके नष्ट होने से इन परिवारों की रोजी-रोटी तथा आवास छिन जाएगा ।
केरपूरा गांव बट जाएगा दो भागों में
केरपुरा गांव को हाल ही में राजस्थान सरकार के नगरीय विकास विभाग में अधिसूचना जारी करते हुए खाटूश्यामजी नगरपालिका में शामिल किया है तथा प्रस्तावित मास्टर प्लान का हिस्सा बनाया है ।प्रस्तावित रेलवे लाइन गांव केरपुरा को इस प्रकार दो भागों में विभक्त करती है कि कैरपुरा का मात्र 20% भाग ही खाटूश्यामजी नगर पालिका के टच में रहता है ,बाकी 80% भाग रेलवे लाइन के दूसरी तरफ रहता है । इससे सरकार की विकास योजनाएं प्रभावित होगी तथा उनको पूरा करना संभव नहीं होगा ।
दुर्घटना की बनी रहेगी आशंका
इस रेलवे लाइन का प्रस्तावित रेलवे स्टेशन भी खाटूश्यामजी की मुख्य आबादी, लखदातार ग्राउंड तथा कैरपुरा की मुख्य आबादी के 200-300 मीटर की दूरी पर ही स्थित है । इससे दुर्घटनाओं तथा मौतों का जोखिम हमेशा बना रहेगा क्योंकि यहां पर लाखों की तादात में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
भविष्य में यहां से अन्य धार्मिक स्थलों से जैसे जीणमाता सालासर के लिए यदि इस लाइन का विस्तार होता है तो पुनः बहुत बड़ी आबादी से भी स्थापित होने का खतरा पैदा हो जाएगा। इस दौरान रमेश सिंह, मोहन दान, राजेंद्र कुमावत, रामस्वरूप कुमावत, भगवाना राम, सागरमल, भोलूराम, मदन दान, बंशीधर, नारायण सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।











































