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जीप से कुचलकर 2 दलित युवकों की हत्या, परिजनों से भाजपा नेताओं ने की मुलाकात

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जयपुर। नागौर जिले के कुचामन के विदयाद के दो चचेरे भाई राजू राम और बाबूलाल कृष्ण और गंगाराम के साथ बाइक पर सवार होकर मौलासर मेला देखकर लोग रात में लौटते समय तीनों युवक राणासर के पास एक होटल में रुके थे। वहां ज्यादा भीड़ होने पर वापस लौटने लगे, तभी कैंपर, बोलेरो और स्कॉर्पियो में बैठे कुछ लोगों ने उन्हें रोकना चाहा और पीछा करना शुरू कर दिया । इस दौरान कुछ दूर पीछा करने के बाद मारने की धमकी देते हुए गाड़ी को बाइक पर चढ़ा दिया। इस घटना में राजूराम और चुन्नीलाल की मौके पर ही मौत हो गई । कृष्णा राम गंभीर रूप से घायल हो गया, उसका भी जयपुर के अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना 28 अगस्त की है उसके बाद से लगातार दलित समाज के लोग कुचामन में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार में अभी तक किसी तरह का कोई कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है।

भाजपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल मिला

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक सांसदों की कमेटी बनाई। कमेटी में सांसद बृजलाल पूर्व डीजीपी यूपी सांसद, कांता कर्दम ,सांसद रंजीता कोली, सांसद डॉक्टर सिकंदर कुमार और मनोज राजोरिया को घटनास्थल पर भेजा गया। सभी सांसदों ने मृतकों के परिजनों से बातचीत की। धरना दे रहे हैं लोगों से भी बातचीत की और सरकार से आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड रुपए देने और सरकारी नौकरी देने की मांग की कमेटी में पूरे प्रकरण की जानकारी ली है और अब इस मामले को दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने रखेंगे।

मंत्री गोविंद राम मेघवाल भी मिले परिजनों से

उधर राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री गोविंद राम मेघवाल ने नागौर जिला कांग्रेस अध्यक्ष जाकिर हुसैन के साथ के साथ कुचामन पहुंचे और पीड़ित परिवार के लोगों से बातचीत की। लेकिन बातचीत बेनतीजा रही क्योंकि गोविंदराव मेघवाल के पास पीड़ित परिवार को देने के लिए या घोषणा करने के लिए कुछ भी नहीं था। वे सिर्फ कोरे आश्वासन से धरना उठाना चाहते थे। जिस पर लोगों ने मना कर दिया। जबकि इससे पूर्व राजस्थान सरकार ही इस तरह के मामलों में 50 लख रुपए मुआवजा, सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर देती है। लेकिन दो युवकों की कुचलकर हत्या करने के मामले में राजस्थान सरकार ने अभी तक किसी तरह का कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है जिससे लोगों में रोष व्याप्त है। एक तरफ सरकार अपने आप को दलित हितेषी बताती है, दूसरी ओर जब भी दलितों का कोई मामला आता हैं तो सरकार की नीति दोगली सामने आती है ।जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। लोगों ने मंत्री गोविंद राम मेघवाल को भी खूब-खरी-खोटी सुनाई।

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