लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
हेडर-थप्पड़ कांड से अभिजीत दीपके हुए मजबूत
क्या एक थप्पड़ किसी आंदोलन को रोक सकता है…?
क्या कुछ युवाओं की गुंडागर्दी लाखों छात्रों की आवाज दबा सकती है…?
जयपुर में अभिजीत दीपके के साथ हुए थप्पड़ कांड के बाद अब सियासत भी गरमा गई है और छात्र आंदोलन भी। दीपके का दावा है कि यह हमला उन पर नहीं, बल्कि छात्रों और अभिभावकों की उस लड़ाई पर हुआ है जो पेपर लीक, भर्ती घोटालों और शिक्षा व्यवस्था की खामियों के खिलाफ लड़ी जा रही है। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष या पार्टी से नहीं व्यवस्था से जिससे लाखों बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है…. दीपके के साथ मारपीट से पूरे देश में उन्हें बहुत से लोगों का समर्थन मिला है… लोगों ने कहा कि सदियों से इसी तरह से इंसाफ की आवाज को दबाने और कुचलने की कोशिश हो रही है……लेकिन कॅाकरोच जनता पार्टी इससे दबने या डरने वाली नहीं है जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता आंदोलन जारी रहेगा… पेश है खास रिपोर्ट……
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जयपुर में उस समय माहौल गरमा गया जब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के साथ धक्का-मुक्की और थप्पड़बाजी कर दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और देखते ही देखते यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। लेकिन जिस घटना को विरोधी दीपके की कमजोरी साबित करना चाहते थे, वही घटना अब उनके समर्थकों के लिए ताकत का प्रतीक बनती दिखाई दे रही है। हालांकि दीपके समर्थकों ने उन युवकों की जमकर धुनाई भी कर दी जिन्होंने दीपके पर हाथ उठाया था वे लोग अपने आपको राष्ट्रवादी बता रहे थे… लेकिन ये आंदोलन तो कतई देश के विरोध में नहीं है… राष्ट्रविरोधी तो कतई नहीं… क्या लोकतंत्र में किसी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाना राष्ट्र विरोध है तो फिर हर आदमी राष्ट्रविरोधी है….देश में आए दिन पेपर लीक हो रहे हैं और नीट का पेपर लीक होने पर 5 बच्चों ने आत्महत्या कर ली… क्या इस प्रकरण में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगना राष्ट्रविरोध है तो फिर बीजेपी और कांग्रेस के सभी नेताओं को तो जेल में डाल देना चाहिए क्योंकि ऐसा कोई नेता ही नहीं होगा जिसने कभी न कभी जीवन में सरकार की नीतियों का इस तरह से विरोध नहीं किया होगा….
अभिजीत दीपके को मिला युवाओं का साथ
दीपके का कहना है कि उन्हें डराने और आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की गई, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका साफ कहना है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पेपर लीक जैसी समस्याओं के स्थायी समाधान तक आंदोलन जारी रहेगा।
दीपके ने आरोप लगाया कि कुछ लोग हर मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम और जाति-पांत के चश्मे से देखते हैं, जबकि उनका आंदोलन पूरी तरह छात्रों और अभिभावकों के अधिकारों की लड़ाई है। हालांकि जयपुर के जिन युवकों ने दीपके को थप्पड़ मारे वे अपने आपको राष्ट्रवादी बता रहे थे….
जोश- जोश में कर दिया चर्चा में आने के लिए हमला
वीओ- सवाल यह भी है कि आखिर एक छात्र आंदोलनकारी पर हमला क्यों हुआ…?क्या यह असहमति को दबाने की कोशिश थी…? या फिर बढ़ती लोकप्रियता से पैदा हुई बेचैनी…?राजनीति के जानकार मानते हैं कि कई बार विरोधियों का हमला किसी नेता या आंदोलनकारी को नुकसान पहुंचाने के बजाय उसे और ज्यादा चर्चा और समर्थन दिला देता है। हालांकि कई बार हमला खुद को चर्चा में लाने के लिए भी किया जाता है और यहां कुछ ऐसा ही जिन युवकों ने मारपीट की उनका कोई पुराना राजनीतिक सरोकार नहीं रहा है बस उन्होंने जोश- जोश में ऐसी हरकत कर दी जिससे जयपुर को ये कलंक लग गया कि देखो राजस्थान की राजधानी जयपुर में किस तरह से दादागिरी से लोकतंत्र की आवाज को कुचला जा रहा है।
आंदोलन होगा और मजबूत
इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी आंदोलन को दबाने की कोशिश हुई है, तब-तब वह और ज्यादा ताकत के साथ उभरा है। अब देखना यह होगा कि जयपुर का यह थप्पड़ कांड अभिजीत दीपके के आंदोलन को नई ऊर्जा देता है या फिर यह विवाद कुछ दिनों में ठंडा पड़ जाता है। फिलहाल इतना जरूर है कि जिस आवाज को दबाने की कोशिश हुई, वह पहले से ज्यादा बुलंद होती नजर आ रही है, अगर उसके पीछे कोई विचार और जनसमर्थन खड़ा हो जाए, तो वही थप्पड़ आंदोलन को नई पहचान भी दे सकता है। पी के टाइम्स की खास खबर में आज के लिए इतना ही …..
