लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नितिन मेहरा, वरिष्ठ संवाददाता (राजस्थान)
बेंगलुरु। कर्नाटक में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष के स्वर खुलकर सामने आने लगे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के आवंटन के बाद एक वरिष्ठ नेता द्वारा मंत्री पद से इस्तीफा देने की खबर ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।
सरकार गठन के बाद जहां कांग्रेस नेतृत्व स्थिर प्रशासन का संदेश देने की कोशिश कर रहा था, वहीं विभागों के बंटवारे को लेकर उभरे विवाद ने पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। बताया जा रहा है कि संबंधित नेता अपनी पसंद का विभाग नहीं मिलने से नाराज थे और उन्होंने शपथ ग्रहण के अगले ही दिन पद छोड़ने का फैसला किया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जताई नाराजगी
नाराज नेता ने बेंगलुरु में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी नाराजगी सार्वजनिक करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान उनसे कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन दिए गए थे, लेकिन विभागों के आवंटन के समय उन वादों को पूरा नहीं किया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक अनुभव और संगठन में योगदान को नजरअंदाज किया गया है। नेता ने कहा कि सम्मानजनक जिम्मेदारी नहीं मिलने के कारण उनके लिए मंत्रिमंडल में बने रहना उचित नहीं है।
विभागों के आवंटन को लेकर बढ़ी नाराजगी
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार विवाद का केंद्र गृह, वित्त, लोक निर्माण (PWD) और बेंगलुरु विकास जैसे महत्वपूर्ण विभाग हैं। माना जा रहा है कि कई वरिष्ठ नेता इन विभागों की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे।
सूत्रों का दावा है कि कुछ अन्य विधायक भी विभागों के बंटवारे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं और पार्टी नेतृत्व हालात पर नजर बनाए हुए है।
पार्टी नहीं छोड़ेंगे, विधायक बने रहेंगे
हालांकि इस्तीफा देने वाले नेता ने स्पष्ट किया है कि उनका कांग्रेस छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे पार्टी की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हैं और विधायक के रूप में जनता की सेवा करते रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि उनका फैसला केवल मंत्री पद तक सीमित है और इसे पार्टी विरोधी कदम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
डैमेज कंट्रोल में जुटा नेतृत्व
घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति संभालने के प्रयास तेज कर दिए हैं। नाराज नेता से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिशें जारी हैं। सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व जल्द ही इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय ले सकता है।
विपक्ष ने साधा निशाना
उधर विपक्ष ने इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार गठन के तुरंत बाद सामने आया यह विवाद कांग्रेस के भीतर समन्वय की कमी को दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतोष को समय रहते दूर नहीं किया गया तो इसका असर सरकार की कार्यशैली और राजनीतिक संदेश दोनों पर पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें कांग्रेस नेतृत्व की अगली रणनीति और नाराज नेता को मनाने के प्रयासों पर टिकी हुई हैं।
















































