लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
नागौर (प्रदीप कुमार डागा)। राष्ट्र सेविका समिति, जो महिलाओं का विश्वव्यापी संगठन है, द्वारा नागौर की पावन धरा पर आयोजित 15 दिवसीय प्रशिक्षण वर्गों का रविवार को समापन हुआ। यह प्रशिक्षण वर्ग 17 मई 2026 से प्रारंभ होकर 31 मई 2026 को संपन्न हुए।
इस अवसर पर वायव्य क्षेत्र एवं जोधपुर प्रांत के तीन प्रमुख प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए गए, जिनमें प्रबोध वर्ग, घोष वर्ग एवं प्रवेश वर्ग शामिल रहे। इन तीनों वर्गों में कुल 222 शिक्षार्थी बहनों ने भाग लिया। इनमें प्रबोध वर्ग में 66, घोष वर्ग में 36 तथा प्रवेश वर्ग में 120 बहनें शामिल रहीं।
अनुशासित दिनचर्या और विविध प्रशिक्षण
प्रशिक्षण अवधि के दौरान सभी शिक्षार्थी बहनों की दिनचर्या अत्यंत अनुशासित एवं सुव्यवस्थित रही। बौद्धिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को राष्ट्रभक्ति, संगठन, सामाजिक चेतना एवं व्यक्तित्व विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया गया। इनमें “समिति कार्य ईश्वर कार्य”, “कुशल संगठक”, “पंच परिवर्तन”, “संघ विचार ही राष्ट्र विचार है” तथा “वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महिला संगठन की आवश्यकता” जैसे विषय प्रमुख रहे।
चर्चा सत्रों के माध्यम से बहनों की तार्किक क्षमता एवं विचारशीलता को बढ़ावा दिया गया, वहीं रात्रि कार्यक्रमों के माध्यम से सांस्कृतिक एवं आत्मिक आनंद की अनुभूति कराई गई।
शारीरिक एवं वैचारिक विकास पर जोर
प्रबोध वर्ग की जानकारी देते हुए सरोज प्रजापत ने बताया कि प्रतिभागियों ने नियुद्ध जैसी शारीरिक गतिविधियों में भाग लेकर शारीरिक क्षमता को सशक्त किया। साथ ही “नारी से नारायणी”, “भगवा ध्वज”, “विश्व में बढ़ता भारत का गौरव” एवं “सशक्त नारी समर्थ भारत” जैसे विषयों पर वैचारिक पाथेय प्राप्त किया।
प्रवेश शिक्षा वर्ग की वर्ग अधिकारी डॉ. यशस्वी शाकद्वीपीय ने बताया कि जोधपुर प्रांत के विभिन्न जिलों से आई शिक्षार्थी बहनों ने प्रशिक्षण के माध्यम से अपने व्यक्तित्व विकास एवं कौशल को निखारा।
अतिथियों ने किया मार्गदर्शन
समापन समारोह में खींवसर फोर्ट से कंवरानी साहिबा मृगेशा कुमारी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने प्रशिक्षण की अनुशासित व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि बहनों को जीवन में अनुशासन, आत्मनिर्भरता एवं देशभक्ति को निरंतर बनाए रखना चाहिए। उन्होंने महिलाओं से आत्मरक्षा, आत्मविश्वास एवं सामाजिक सशक्तिकरण पर बल देने का आह्वान किया। 
राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण : डॉ. वंदना वज़ीरानी
मुख्य वक्ता राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय व्यवस्था प्रमुख एवं वायव्य क्षेत्र कार्यवाहिका डॉ. वंदना वज़ीरानी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि समिति की स्थापना 1936 में वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) द्वारा की गई थी, जिसका उद्देश्य महिलाओं को संगठित कर राष्ट्रसेवा की दिशा में प्रेरित करना है।
उन्होंने “पंच परिवर्तन” की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि—
- स्व का बोध – अपनी संस्कृति एवं परंपराओं पर गर्व
- कुटुंब प्रबोधन – मजबूत एवं संस्कारित परिवार व्यवस्था
- सामाजिक समरसता – समाज में एकता एवं समानता
- पर्यावरण संरक्षण – प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी
- नागरिक कर्तव्य – राष्ट्र के प्रति दायित्वों का पालन
उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को जीवन में अपनाकर महिलाएं राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।
कार्यक्रम के सफल संचालन में प्रांत प्रचारिका ऋतु शर्मा सहित सभी शिक्षिकाओं एवं कार्यकर्ताओं का योगदान रहा।













































