लोक टुडे न्युज़ नेटवर्क
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर हो रही सघन मॉनिटरिंग
जयपुर । मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रदेशभर में 4 नवम्बर से 18 नवम्बर तक 15 दिवसीय सड़क सुरक्षा अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना, यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना और आपातकालीन सहायता प्रणाली को मजबूत बनाना है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा गृह विभाग से समेकित रिपोर्ट प्राप्त कर अभियान की सघन मॉनिटरिंग की जा रही है।
विभागवार जिम्मेदारियां तय
अभियान के सफल संचालन के लिए विभागवार जिम्मेदारियां तय की गई हैं। पुलिस विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो प्रदेशभर में अभियान का फील्ड-लेवल समन्वय एवं पर्यवेक्षण कर रहा है। पुलिस द्वारा शराब पीकर, तेज गति से, गलत दिशा में या खतरनाक तरीके से वाहन चलाने वालों के विरुद्ध विशेष प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। बिना रिफ्लेक्टर या नंबर प्लेट वाले वाहनों पर भी कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
सभी राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर संबंधित थाना और यातायात टीमें तैनात की गई हैं। साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हाईवे मोबाइल यूनिट और एम्बुलेंस निर्धारित मानकों के अनुसार कार्यरत रहें। सभी छह लेन राजमार्गों पर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-48 मॉडल के अनुरूप लेन ड्राइविंग सिस्टम लागू किया जाएगा।
शराब सेवन और ओवरस्पीड पर सख्त कार्रवाई
परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग द्वारा ओवरलोडिंग, अनाधिकृत संचालन, फिटनेस उल्लंघन, शराब सेवन और ओवरस्पीड मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है। चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन/निरस्तीकरण की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। विभाग द्वारा वाहन चेकिंग, रिफ्लेक्टर टेप लगवाने, सड़क सुरक्षा कार्यशालाएं एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
हटेंगे अवैध ढाबे और संरचनाएं
सार्वजनिक निर्माण विभाग और एनएचएआई सहित संबंधित एजेंसियों द्वारा 15 दिनों में सभी राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर अनाधिकृत कट बंद किए जाएंगे। सड़क किनारे की झाड़ियां हटाने, गड्ढों की मरम्मत, रेलिंग लगाने और साइन बोर्ड लगाने का कार्य शुरू किया गया है। अवैध ढाबे, बस स्टैंड और अन्य अनाधिकृत संरचनाओं को भी हटाया जा रहा है।
45 वर्ष से अधिक आयु के चालकों का नेत्र परीक्षण
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा 45 वर्ष से अधिक आयु के चालकों का नेत्र परीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। एम्बुलेंस और ट्रॉमा सेंटर की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जा रहा है ताकि दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित चिकित्सकीय सुविधा मिल सके।
नगरीय विकास विभाग द्वारा फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करने, ट्रैफिक सिग्नल व सड़क प्रकाश व्यवस्था सुधारने तथा जन-जागरूकता के लिए बैनर, पोस्टर और डिजिटल डिस्प्ले लगाए जा रहे हैं।
चालकों से अत्यधिक समय तक वाहन चलवाने पर कार्रवाई
श्रम विभाग द्वारा ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर निगरानी रखी जा रही है ताकि चालकों से अत्यधिक समय तक वाहन न चलवाया जाए। इस पर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
जिला स्तर पर मॉनिटरिंग और जनसहभागिता
जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा संयुक्त रूप से जिला सड़क सुरक्षा समितियों के माध्यम से अभियान की मॉनिटरिंग की जा रही है। अभियान में एनजीओ, स्वयंसेवी संस्थाएं और स्थानीय युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है।
हेलमेट, सीट बेल्ट, मोबाइल उपयोग निषेध और डिपर उपयोग को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने वाले नागरिकों को भी सम्मानित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, सड़क सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है और इस अभियान का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाकर एक सुरक्षित और जिम्मेदार यातायात व्यवस्था स्थापित करना है।