लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
उनियारा (दुर्योधन मयंक)।
श्री दिगम्बर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र सुथड़ा में देवाधिदेव श्री सुमतिनाथ भगवान का तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। प्रबंध समिति के अध्यक्ष महावीर प्रसाद पराणा व सन्तु जैन ने बताया की भगवान सुमतिनाथ जैन धर्म के वर्तमान अवसर्पिणी काल के पाँचवें तीर्थंकर हैं। उनका जन्म अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश में राजा मेघरथ और महारानी सुमंगला (या मंगलावती) के यहाँ हुआ था। “सुमति” का अर्थ है “श्रेष्ठ बुद्धि” या “सही सोच”; माना जाता है कि उनके गर्भ में आने के बाद उनकी माता की बुद्धि और न्याय करने की शक्ति बहुत बढ़ गई थी, जिस कारण उनका नाम सुमतिनाथ रखा गया। उनका जन्म: वैशाख शुक्ल अष्टमी को अयोध्या नगरी में हुआ।उनका प्रतीक चिह्न लांछन (चिह्न) चकवा (कौंच) पक्षी है।वर्ण और उनके शरीर का वर्ण स्वर्ण के समान (सुवर्ण) था और उनकी ऊँचाई 300 धनुष बताई गई है।सुमतिनाथ जी ने सांसारिक सुखों का त्याग कर वैशाख शुक्ल नौमी को दीक्षा ली। उन्होंने साहेतुक वन में प्रियंगु वृक्ष के नीचे तपस्या की।केवल ज्ञान: 20 वर्षों की भगवान सुमतिनाथ जैन धर्म के वर्तमान अवसर्पिणी काल के पाँचवें तीर्थंकर हैं।
भगवान सुमतिनाथ ने सम्मेद शिखरजी (झारखंड) से मोक्ष प्राप्त किया। इस अवसर पर शास्त्री प्रिंस जैन देवांश के निर्देशन में सर्वप्रथम मंगलाष्टक कर नित्य अभिषेक शांति धारा की गई। वार्षिक शांतिधारा रमेशचंद, रौनक सर्राफ जयपुर, पांडुशिला पर शांतिधारा प्रथम कमल कुमार, अनीता देवी मेडिकल वाले उनियारा ने की। उसके बाद देव शास्त्र पूजा चौबीस भगवान की मुलनायक और सुमतिनाथ भगवान की पूजा कर धर्मनाथ भगवान का गर्भ कल्याणक महामहोत्सव मनाया गया भक्तामर संयोजक हुकुमचंद शहर वाले एवं नरेंद्र जैन बनेठा ने बताया कि सांय 7:00 बजे श्रेष्ठी परिवार महावीर प्रसाद, धर्मचंद दाखियावाले वाले टोंक एवं शनिवार भक्तामर अनुष्ठान मंडल उनियारा द्वारा भक्तामर दीपार्चना सानंद संपन्न की गई।
