नागौर में मानवता की मिसाल: सुशीला देवी ललवानी का देहदान और नेत्रदान

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लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क

महावीर इंटरनेशनल की प्रेरणा से पुत्र सुभाष चंद ललवानी की पहल, मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन में आएगा पार्थिव शरीर; नेत्रदान से दो लोगों को मिल सकती है रोशनी

नागौर (प्रदीप कुमार डागा)। नागौर में देहदान और नेत्रदान के माध्यम से मानवता, सेवा और परोपकार की प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। महावीर इंटरनेशनल नागौर केंद्र से प्रेरित होकर सुभाष चंद ललवानी ने अपनी दिवंगत माताजी सुशीला देवी ललवानी के पार्थिव शरीर के देहदान और नेत्रदान की व्यवस्था कर उन्हें अनूठी श्रद्धांजलि दी।

संस्था अध्यक्ष विमलचंद नाहटा और पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र संखलेचा ने बताया कि करीब तीन महीने पहले डॉक्टर डे के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में सुभाष चंद ललवानी ने स्वयं और अपनी पत्नी के देहदान का संकल्प पत्र भरा था। संस्था के प्रयासों से प्रेरित होकर उन्होंने अब अपनी माताजी के निधन के बाद भी देहदान का निर्णय लिया। पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए समर्पित करने की पहल की गई।

नेत्रदान से दूसरों के जीवन में आएगा उजाला

इस अवसर पर महावीर इंटरनेशनल के वीर सदस्य पंकज नाहटा ने सुभाष चंद ललवानी को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। सुभाष चंद ने सहमति देते हुए नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी करवाई। डॉ. देवेंद्र शर्मा और उनकी टीम ने जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न कराई।

पंकज नाहटा ने कहा कि शरीर नश्वर है, लेकिन नेत्रदान के माध्यम से मृत्यु के बाद भी दूसरों के जीवन में रोशनी लाई जा सकती है। यह सेवा किसी जरूरतमंद के जीवन में नई उम्मीद जगाने का माध्यम बनती है।

संस्था के सदस्यों ने जताया आभार

इस मानवीय पहल के अवसर पर महावीर इंटरनेशनल और यूथ क्लब के कई सदस्य उपस्थित रहे। इनमें दशरथ मल लोढ़ा, नरेंद्र संखलेचा, मनीष सुराना, आनंद अग्रवाल, रामकिशोर सारडा, रामानुज मालानी, सुशील ललवानी, विनोद ललवानी, संजय डागा, सुमित चोरड़िया, धीरज संकलेचा, सिद्धार्थ चोरड़िया, प्रीतम ललवानी, राजेंद्र कटारिया और पंकज नाहटा सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।

महावीर इंटरनेशनल परिवार ने सुभाष चंद ललवानी के इस मानवीय और समाजोपयोगी निर्णय की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया। सुभाष चंद ललवानी ने कहा कि देहदान और नेत्रदान जैसे कार्यों से समाज में जागरूकता बढ़ेगी और अधिक लोग इस पुनीत कार्य के लिए आगे आने को प्रेरित होंगे।

सुशीला देवी ललवानी के देहदान और नेत्रदान की यह पहल शोक की घड़ी में भी मानव सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देती है।

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