लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
राजस्थान से वरिष्ठ संवाददाता : नितिन मेहरा
मदन राठौड़ के ‘कथित’ बयान पर राजस्थान में सियासी उबाल धर्मेंद्र राठौड़ ने पुलिसिया कार्रवाई को बताया लोकतंत्र की हत्या
अजमेर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के एक कथित बयान को लेकर राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब विरोध प्रदर्शन कर रहे यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस ने कानूनी शिकंजा कस दिया। इस पुलिसिया एक्शन पर पूर्व आरटीडीसी (RTDC) चेयरमैन और कांग्रेस के दिग्गज नेता धर्मेंद्र राठौड़ ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
धर्मेंद्र राठौड़ ने सूबे की भजनलाल सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इस कार्रवाई को पूरी तरह से एकतरफा और तानाशाही करार दिया है। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की सजा मुकदमे के रूप में क्यों दी जा रही है?
विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप
कांग्रेस नेता धर्मेंद्र राठौड़ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के कथित बयान से आम जनता और युवाओं के बीच भारी असंतोष है। जब यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इस पर अपनी लोकतांत्रिक असहमति दर्ज कराई, तो उनके खिलाफ थानों में केस दर्ज कर दिए गए। राठौड़ ने कहा, “लोकतंत्र में जनता और विपक्ष को यह अधिकार है कि वह नेताओं के गलत बयानों का विरोध कर सके, लेकिन सत्ता के मद में चूर सरकार अब युवाओं की आवाज को दबाना चाहती है।”
कथनी और करनी के फेर में फंसी सरकार
पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि इस घटना ने भाजपा के उस चेहरे को बेनकाब कर दिया है जो खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का पैरोकार बताती है। उन्होंने राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर तुरंत अपना रुख साफ करने और युवाओं पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की है।
इस घटना के बाद अजमेर और आस-पास के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ने के आसार हैं।
























































