लोक टुडे न्यूज़ नेटवर्क
मेड़ता सिटी (नागौर)।
रेण कस्बे के वार्ड संख्या 20 में स्थित चौकीदारों के मोहल्ले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। झुग्गी में रह रहे सात मासूम बच्चों को उनके माता-पिता तीन माह पहले नींद में छोड़कर लापता हो गए। तब से ये बच्चे अपने दम पर जीवनयापन के लिए संघर्ष कर रहे थे।
रातों-रात गायब हो गए माता-पिता
जानकारी के अनुसार, घनश्याम चौकीदार और रेखा चौकीदार अपने सात बच्चों के साथ झुग्गी में रह रहे थे। करीब तीन माह पहले पिता घनश्याम घर छोड़कर चला गया, और कुछ समय बाद मां रेखा भी एक रात बच्चों को सोते हुए छोड़कर गायब हो गई।
अब तक दोनों का कोई सुराग नहीं मिला है। बच्चों की उम्र 15 वर्ष से कम बताई जा रही है।
ग्रामीणों ने बढ़ाया मदद का हाथ
पास ही रहने वाली दया वैष्णव और उनकी पुत्री सोनू वैष्णव ने जब यह स्थिति देखी तो उन्होंने बच्चों की मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाया। उन्होंने बच्चों को सर्दी से बचाने के लिए कपड़े और जरूरी सामान उपलब्ध करवाया।
साथ ही व्यापारी श्याम सुंदर लखारा सहित कई समाजसेवियों ने भी सहयोग किया।
इंदिरा रसोई के माध्यम से बच्चों के लिए दोनों समय का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
जागरूक ग्रामीणों ने बच्चों की स्थिति को देखते हुए बाल विकास कल्याण विभाग नागौर को सूचना दी और बच्चों के लिए सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था की मांग की।
बाल कल्याण समिति और विधायक पहुंचे मौके पर
सूचना मिलने पर बाल कल्याण समिति न्यायपीठ नागौर के अध्यक्ष डॉ. मनोज सोनी और मेड़ता विधायक लक्ष्मणराम कलरू मौके पर पहुंचे।
उन्होंने बच्चों और आसपास के लोगों से बातचीत कर पूरी स्थिति की जानकारी ली।
एक बच्चे के सिर पर गहरा घाव पाया गया, जिसके बाद सभी बच्चों को रेण सीएचसी लाकर स्वास्थ्य परीक्षण करवाया गया।
डॉ. महेंद्र विश्नोई, डॉ. पंकज मीणा और रामकिशोर मेघवाल ने जांच की।
रेण चौकी प्रभारी रामप्रकाश माली और सीताराम तांडी की देखरेख में बच्चों को 108 एम्बुलेंस से नागौर भेजा गया।
तीन बच्चों को राजकीय शिशु गृह नागौर, जबकि दो बालिकाओं को वन स्टॉप सेंटर भेजा गया है।
ग्रामीण बोले — प्रशासन करे स्थायी व्यवस्था
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि इन मासूमों के लिए दीर्घकालिक देखभाल और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
लोगों का कहना है कि “गरीबी और लाचारी के बीच पले ये बच्चे समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी हैं।”