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हिंदू बहन सीता का मुस्लिम समाज के भाईयों ने भरा मायरा

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लोक टुडे न्यूज नेटवर्क

दो समुदायों ने की एकता की मिसाल कायम

सवाई माधोपुर से लोकेश टटवाल की  रिपोर्ट
जिला मुख्यालय के भगवतगढ़ गांव की एक ढाणी में सीता धोबी नाम की महिला अपने बेटे की शादी समारोह होने के चलते अपने पीहर गोगोर निवासी भाई को भात देने के लिए छाबड़ी लेकर निमंत्रण देने गई थी। लेकिन न जाने किसी कारणवश सीता के भाइयों ने अपनी बहन के भात का निमंत्रण ठुकरा दिया । सीता भी गुस्से में नाराज होकर बगैर भाईयों को न्यौता दिए ही लौट आई।  सीता अपने ससुराल लौटते समय  गोगोर गांव की मस्जिद में निमंत्रण स्वरूप ले गई छाबड़ी को रख दिया। ये बात जब मुस्लिम समुदाय के लोगों को पता लगी स्थानीय गद्दी समाज के लोगों ने आपस में बैठक कर निर्णय लिया कि हिंदू बहन सीता का उसके सगे भाई भात नहीं भर रहे। सीता ने शादी का निमंत्रण भी मस्जिद में रख दिया। इसलिए अब हमारी जिम्मेदारी बनती है की हम भाई का फर्ज निभाएं और बहन का भात भरें क्योंकि है तो वो हमारे गांव की बेटी ही।

इसी दरमियान गांव के गद्दी समाज के पच पटेल ने निर्णय लिया और आपसी सहयोग से बीती रात सीता के परिवार के लिए 45 जोड़ी कपड़े,51 हजार रुपये नगद देकर मायरा भरने पहुंचे । वही बहन सीता ने भी मुस्लिम भाईयों  की खूब आवभगत की।  ऐसे में जहां देश के हालात दो समुदायों में बढ़ रही कट्टरता के रूप में लगातार सोशल मीडिया पर दिखाए जाते हैं। कई बार ऐसा लगता है जैसे हिंदू – मुस्लिम भाई- भाई न रहकर एक दूसरे के दु्श्मन हो गए। ऐसे  समय में जब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक हिंदू बहन के बेटे की शादी में हिंदू रिती रिवाज के अनुसार भात भरने गए। मुस्लिम भाईयों का हिंदू बहन ने तिलक लगाकर स्वागत किया। भाईयों ने क्लश  पूजा की धर्म बहन को कपड़े भेंट किए। सीता के पूरे परिवार और रिश्तेदारों की पहरावनी की। सबको तिलक लगाकर कपड़े और शगुन के तौर पर रुपये भेंट किए। मुस्लिम भाईयों ने बहन की थाली में 51 हजार रुपये रखे। गोगोर के जादौन इंटरप्राइजेज के मालिक साबिर सेठ व साजिद मास्टर द्वारा 31 हजार रुपए व अन्य राशि हाजी इलियास नूरद्दीन साबू अमीर आमीन शकील इमरान आबिद व समस्त गोगो निवासियों ने भात के लिए एकत्रित कर दी । ऐसे में यह सौहार्द भरा मायरा दो समुदायों के बीच आपसी भाईचारे और प्रेम का संदेश देता नजर आया। हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल कायम की।  जहां एक समुदाय ने दूसरे समुदाय की बेटी को अपनी बेटी बनाकर मायरा भरा और हिंदू मुस्लिम एकता का परिचय दिया । हिंदू -मुस्लिम भाईचारे के चर्चे आस- पास के इलाके में भाईचारा जरुर बढ़ाएंगा। इस मायरे की चर्चा देशभर में जरुर लोगों को अच्छा संदेश देगी। हमारी रगों में अभी गंगा- जमूनी संस्कृति बहती है जहां हम एक दूसरे के संकट में साथ खड़े रहते हैं। भले वो देश की सीमा पर खतरा हौ या फिर हमारे आपस में परिवारों पर संकट के समय एक दूसरे के साथ खड़े रहना ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है।

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